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#NewsBytesExplainer: भारत के खिलाफ 'अनुचित व्यापार प्रथाओं' की जांच क्यों कर रहा अमेरिका, क्या होगा असर?
अमेरिका ने टैरिफ से जुड़ा एक और विवादित कदम उठाया हैे

#NewsBytesExplainer: भारत के खिलाफ 'अनुचित व्यापार प्रथाओं' की जांच क्यों कर रहा अमेरिका, क्या होगा असर?

लेखन आबिद खान
Mar 12, 2026
03:03 pm

क्या है खबर?

अमेरिका ने एक नए विवादित कदम के तहत भारत समेत 16 व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ 'अनुचित व्यापार प्रथाओं' के मामले में जांच शुरू की है। इस कदम को टैरिफ लगाने की नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रियर ने बताया कि सरकार 1974 के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत ये जांच करेगी। आइए इसका भारत पर असर समझते हैं।

जांच

धारा 301 के तहत जांच क्या होती है?

1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 एक शक्तिशाली व्यापार प्रवर्तन नियम है। ये अमेरिका को उन विदेशी नीतियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम बनाती है, जिन्हें वह व्यापार के लिए नुकसानदायक मानता है। यह कानून अमेरिका को उन नीतियों, विनियमों और बाधाओं की जांच करने की अनुमति देता है जो अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, बाजार पहुंच को प्रतिबंधित कर सकती हैं या अमेरिकी निर्यात पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं।

तरीका

कैसे होती है जांच?

जांच के तहत अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) सार्वजनिक टिप्पणियों और संबंधित देश समेत कई माध्यमों से सबूत जुटाता है। इन जांचों को पूरा होने में कई महीने लग जाते हैं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही अमेरिकी राष्ट्रपति उस खास देश पर टैरिफ लगा सकते है, जिन्हें अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल माना जाता है। जांच के तहत 15 अप्रैल तक जनता की टिप्पणियां ली जाएंगी, 5 मई को सार्वजनिक सुनवाई होगी और जुलाई तक जांच पूरी होगी।

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देश

जांच के दायरे में कौन-कौनसे देश हैं?

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रियर ने बताया कि ये जांच चीन, यूरोपीय संघ (EU), भारत, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, जापान, ताइवान, वियतनाम, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, बांग्लादेश और थाईलैंड के खिलाफ की जाएगी। अमेरिका का दूसरे सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार कनाडा सूची में शामिल नहीं है। ग्रियर ने कहा, "ये जांच उन अर्थव्यवस्थाओं पर केंद्रित होंगी, जिनके बारे में हमारे पास सबूत हैं कि वे विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों में संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता और उत्पादन प्रदर्शित करती हैं।"

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वजह

आखिर अमेरिका ये जांच क्यों कर रहा है?

ग्रियर ने कहा, "अमेरिका का मानना है कि कई देशों ने उत्पादन क्षमता इतनी बढ़ा ली है कि वह वैश्विक मांग के अनुरूप नहीं है। ये देश जरूरत से ज्यादा उत्पादन की समस्या को अमेरिका पर डाल रहे हैं और बड़ी मात्रा में सामान यहां भेज रहे हैं।" उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की कंपनी BYD उज्बेकिस्तान, थाईलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में कारखानों के साथ अपने विदेशी विनिर्माण विस्तार को तेजी से बढ़ा रही है।

टैरिफ

क्या टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट में लगे झटके के बाद उठाया गया कदम?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को गैरकानूनी घोषित करने के बाद इस जांच को वैकल्पिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, ये जांच ट्रंप प्रशासन को व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ विश्वसनीय टैरिफ धमकी को फिर से स्थापित करने का एक रास्ता प्रदान करती है, ताकि वे बातचीत जारी रखें और उन व्यापार समझौतों को लागू करें, जो अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत उच्च टैरिफ दरों को कम करने के लिए किए गए थे।

भारत

भारत पर क्या होगा असर?

जांच का तुरंत भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अगर जांच में उल्लंघन पाए जाते हैं, तो भारत से होने वाले निर्यातों पर अमेरिका टैरिफ लगा सकता है। अमेरिका को निर्यात की जाने वाली दवाइयों की लागत बढ़ सकती है या उन पर सख्त नियम लागू हो सकते हैं। इसके अलावा वस्त्र और परिधान भी प्रभावित हो सकते हैं, जबकि ऑटो कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग सामानों की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है या लागत बढ़ सकती है।

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