अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए टैरिफ, अब भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का क्या होगा?
क्या है खबर?
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया है। ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसके बाद दोनों देशों में अंतरिम व्यापार समझौता हुआ, जिसके तहत टैरिफ कम कर 18 प्रतिशत किया गया। अब कोर्ट ने टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है, तो सवाल उठ रहे हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भविष्य क्या है। आइए समझते हैं।
रिपोर्ट
समझौते पर बातचीत जारी रखेंगे दोनों देश- रिपोर्ट
हिंदुस्तान टाइम्स ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से कहा है कि दोनों देश संयुक्त बयान की भावना के अनुरूप और बदली हुई स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक 'पारस्परिक रूप से लाभकारी' अंतरिम व्यापार समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सूत्रों ने कहा, "पारस्परिक लाभप्रद समझौते के लिए आदर्श रूप से अमेरिका को या तो 15 प्रतिशत टैरिफ या मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) दरों को कम करना होगा।"
टैरिफ
क्या अमेरिका कम करेगा टैरिफ?
एक सूत्र ने कहा, "बदली हुई स्थिति के अनुसार टैरिफ संबंधी प्रतिबद्धताओं को बदलना पड़ सकता है, क्योंकि संयुक्त बयान में विशेष रूप से ऐसे समायोजन का प्रावधान है।" दरअसल, व्यापार समझौते के अमेरिका भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, लेकिन कोर्ट ने टैरिफ रद्द कर दिए हैं। हालांकि, इसके बाद ट्रंप ने एक नए कानून के तहत सभी देशों पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
बयान
ट्रंप बोले- भारत टैरिफ देता रहेगा
ट्रंप ने कहा, "कुछ नहीं बदला है। भारत टैरिफ का भुगतान करेगा। हम टैरिफ का भुगतान नहीं करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, यह पहले जैसा था, उससे उलट है। हमने भारत के साथ एक समझौता किया और अब यह एक निष्पक्ष समझौता है। हम उन्हें टैरिफ भुगतान नहीं कर रहे हैं। अब भारत भुगतान कर रहा है।" ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा था कि वह बहुत अच्छे हैं लेकिन हमसे ज्यादा टैरिफ वसूल रहे थे।
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं जानकार?
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, "अमेरिका-भारत एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार हैं, इसलिए जल्द ही लाभकारी समाधान निकलने की उम्मीद है। सभी देशों पर 15 प्रतिशत टैरिफ होने से 18 प्रतिशत टैरिफ का कोई महत्व नहीं रह जाता।" डेलॉयट इंडिया के पार्टनर गुलजार डिडवानिया ने कहा, "रेसिप्रोकल टैरिफ अब मान्य नहीं है। इसलिए 18 प्रतिशत की दर का प्रश्न ही नहीं उठता। सभी देशों की तरह भारत पर भी 15 प्रतिशत दर लागू होगी।"