ईरान-इजरायल युद्ध से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका, भारत पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का असर अब पूरी दुनिया पर दिख सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने और भू-राजनीतिक जोखिम का असर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन तनाव लंबा चला या आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई, तो इसका नकारात्मक असर देखने को मिलगा।
कीमत
150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं कीमतें
दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत ईरान के नजदीक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। जानकारों का मानना है कि अगर ईरान इस रास्ते को केवल एक दिन के लिए भी बंद करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। शुक्रवार को कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है। एक महीने में इसकी कीमत में 6 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हुआ है।
भारत
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अगर आपूर्ति में रुकावट आई, तो आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चा तेल 10 से 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
सोना चांदी
बढ़ सकती है सोना-चांदी की कीमत
युद्ध के समय शेयर बाजार की बजाय सोना-चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने कहा, "सोमवार को जब MCX पर कारोबार की शुरुआत होगी तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। सोने के भाव में 5 प्रतिशत और चांदी के भाव में 7 से 8 प्रतिशत तक की जोरदार तेजी देखी जा सकती है। युद्ध लंबा चला तो 10 ग्राम सोना 1.90 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।"
प्लस
होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में जानिए
होर्मुज फारस की खाड़ी में प्रवेश करने का एकमात्र समुद्री मार्ग है। इसके एक तरफ ईरान तो दूसरी तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हैं। 39 किलोमीटर लंबा यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह 33 किलोमीटर और अधिकतम 95 किलोमीटर तक चौड़ा है। यहां से रोजाना 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 8 करोड़ टन नेचुरल गैस की आवाजाही होती है। वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत यहीं से गुजरता है।