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'है जवानी तो...' रिव्यू: वरुण धवन की फिल्म देखने जाएं या पैसे बचाएं? जनता ने बताया
'है जवानी तो...' रिव्यू: कैसी है वरुण धवन की ये फिल्म?

'है जवानी तो...' रिव्यू: वरुण धवन की फिल्म देखने जाएं या पैसे बचाएं? जनता ने बताया

Jun 05, 2026
03:42 pm

क्या है खबर?

वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फिल्म देखने के बाद फैंस और दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच मिला-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आइए जानें डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर जनता की क्या राय

प्रतिक्रिया

बिना दिमाग लगाए सिर्फ मजे करने वाली फिल्म

दर्शकों के एक वर्ग का मानना है कि 'है जवानी तो इश्क होना है' एक पूरी तरह से 'पैसा वसूल' एंटरटेनर फिल्म है। ये उन चुनिंदा फिल्मों की श्रेणी में आती है, जो दर्शकों से दिमाग लगाने के लिए नहीं, बल्कि थिएटर में बैठकर सिर्फ और सिर्फ खुलकर मजे करने की मांग करती है। वरुण और डेविड के फैंस का मानना है कि इस फिल्म में कॉमेडी, रोमांस, जज्बात और फैमिली ड्रामा का बिल्कुल सटीक तालमेल देखने को मिलता है।

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पैसा वसूल है या नहीं?

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फिल्म देख क्या बोले दर्शक?

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निराशा

पुरानी कहानी और कमजोर स्क्रीनप्ले ने किया निराश

दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म को लेकर निराशा जताई है। उनका कहना है कि फिल्म से उन्हें सिर्फ मायूसी मिली। वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े जैसे सितारों के बावजूद अनुभव उबाऊ रहा। लोगों ने आरोप लगाया कि कहानी पुरानी और घिसी-पिटी है, जबकि स्क्रीनप्ले बेहद कमजोर है। जबरदस्ती डाली गई कॉमेडी भी नहीं जमी। दर्शकों के अनुसार, फिल्म में मनोरंजन का कोई मजबूत पल नहीं है और इसे समय व पैसे की बर्बादी बताया जा रहा है।

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यूजर का रिव्यू

कमियां

वरुण धवन की दमदार कॉमिक टाइमिंग के बावजूद दर्शकों को खली ये कमियां

कुछ दर्शकों का मानना है कि कहानी का कंफ्यूजन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। हालांकि, वरुण धवन ने अपनी दमदार एनर्जी और कॉमिक टाइमिंग से फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश की है। दर्शकों को मृणाल रास नहीं आईं। उन्हें कुछ खास स्क्रीन स्पेस भी नहीं मिला, जबकि पूजा की मौजूदगी और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री पसंद की गई, लेकिन दर्शकों के मुताबिक, कमजोर स्क्रीनप्ले के कारण दोनों अभिनेत्रियों के किरदार पूरी तरह उभर ही नहीं पाए।

राय

'है जवानी तो इश्क होना है' देखकर निकले दर्शकों की दोटूक

दर्शकों का मानना है कि डेविड धवन ने फिल्म को पूरी तरह मनोरंजन मोड में रखा है, क्योंकि उन्हें पता है कि जनता गंभीर सिनेमा देखने नहीं आई है। फिल्म देख सिनेमाघरों से लौटे दर्शकों के मुताबिक, फिल्म कुछ जगहों पर हंसाती है और टाइमपास के लिए सही है। हालांकि, उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर सिनेमाघरों में एक मजबूत कहानी, तार्किक स्क्रीनप्ले या किसी नई सोच की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो आपको केवल निराशा हाथ लगेगी।

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