भारत-यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते में क्या-क्या है, इसके क्या फायदे होंगे?
क्या है खबर?
भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (EU) के बीच मंगलवार को सालों से अटका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है। इसे 'सभी व्यापार समझौतों की जननी' कहा जा रहा है। इसकी घोषणा 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा-कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर-लेयेन ने की। आइए जानते हैं इस समझौते में क्या-क्या है और इससे समझौते में शामिल देशों को क्या-क्या फायदे होंगे।
जननी
समझौते को 'सभी व्यापार समझौतों की जननी' क्यों कहा जा रहा?
भारत-EU के बीच इस FTA को दोनों पक्षों द्वारा 'सभी समझौतों की जननी' कहा जा रहा है क्योंकि इसका उद्देश्य व्यापक आर्थिक लाभ प्रदान करना है। बड़ी बात यह है कि इस समझौतों में EU में शामिल 27 देश शामिल हैं और उन सभी से होने वाले व्यापार पर यह प्रभावी होगा। इन देशों में शामिल जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन के साथ भारत का व्यापार अच्छा है। ऐसे में इसका भारत को सीधा लाभ मिलेगा।
तकनीक
औद्योगिक और तकनीकी उत्पादों पर पड़ेगा बड़ा असर
इस FTA के बाद EU से आयातित केमिकल उत्पादों पर लगने वाली 22 प्रतिशत टैरिफ लगभग खत्म हो जाएगा, जिससे व्यापक उत्पाद रेंज सस्ती हो जाएंगी। यूरोपीय मशीनरी पर लागू 44 प्रतिशत टैरिफ घटने से पूंजीगत माल और औद्योगिक लागत घटेगी। EU फार्मा उत्पादों पर लगने वाला 11 प्रतिशत टैरिफ खत्म होने से करीब 90 प्रतिशत दवाइयां, ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण सस्ते हो जाएंगे। विमानन और अंतरिक्ष क्षेत्र के उपकरणों पभी टैरिफ पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
सस्ता
भारत में सस्ती होंगी लग्जरी कारें
इस FTA का बड़ा असर ऑटो क्षेत्र में देखने को मिलेगा। मर्सिडीज, BMW या ऑडी जैसी यूरोपीय कारें अब काफी सस्ती हो जाएंगी। अब तक इन कारों पर 100 प्रतिशत से ज्यादा आयात शुल्क लगाता था, लेकिन अब 15,000 यूरो (करीब 16.30 लाख रुपये) से महंगी कारों पर यह शुल्क घटाकर 40 प्रतिशत और फिर धीरे-धीरे 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इससे इन लग्जरी कारों की कीमतों में आने वाले समय में लाखों रुपये तक की कमी आ जाएगी।
अन्य
भारत को इन क्षेत्रों में भी होगा फायदा
इस FTA से विमानों के पुर्जे, मोबाइल पार्ट्स और हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर टैरिफ खत्म होने से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग की लागत घटेगी। इससे लोगों के लिए मोबाइल फोन के साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान या उनके उपकरण खरीदना काफी सस्ता हो जाएगा। इसी तरह, लोहे, स्टील और केमिकल उत्पादों पर शून्य टैरिफ का प्रस्ताव है। इससे निर्माण और औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल की कीमतें गिरेंगी, जिससे घर बनाना या औद्योगिक सामान खरीदना सस्ता हो जाएगा।
जानकारी
भारतीय निर्यातकों को होगा बड़ा फायदा
इस समझौते से सामान ही सस्ता नहीं होगा, बल्कि भारतीय कपड़ा, चमड़ा और हीरे-जवाहरात के कारोबारियों के लिए यूरोप का विशाल बाजार मिलेगा। भारतीय कपड़ों पर टैक्स खत्म होने से भारत अब बांग्लादेश और वियतनाम को पछाड़कर नंबर-1 हो जाएगा।
खान-पान
खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ेगा असर
इस FTA से जैतून का तेल, मार्जरीन और चुनिंदा वनस्पति तेलों पर टैरिफ कम या पूरी तरह खत्म होने से ये सामान काफी सस्ते हो जाएंगे। फलों के रस और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर आयात शुल्क हटा दिया जाएगा। बीयर पर टैरिफ घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इसी तरह वाइन या व्हिस्की पर लगने वाला 100 से 125 प्रतिशत टैरिफ कम होकर 20-30 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इससे विदेशी प्रीमियम व्हिस्की ब्रांड्स तक लोगों की पहुंच आसान हो जाएगी।
यूरोप
यूरोपीय कंपनियों को भी मिलेगा बड़ा फायदा
FTA के तहत भारत ने भी EU को बड़ी रियायतें दी हैं। इसके तहत कारों पर टैरिफ 110 से घटकर चरणबद्ध तरीके से 10 तक, ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ 5-10 साल में पूरी तरह खत्म, मशीनरी पर लगने वाले 44 प्रतिशत, केमिकल्स पर 22 प्रतिशत और फार्मा पर 11 प्रतिशत टैरिफ को लगभग खत्म किया जाएगा। यूरोपीय SME के लिए नई निर्यात संभावनाओं तैयार की जाएंगी। इसके लिए दोनों पक्ष SME समर्थित हेल्पडेस्क और संपर्क बिंदु स्थापित करेंगे।
अन्य
यूरोप के इन उत्पादों पर भी घटेगा टैरिफ
समझौते के तहत EU के कृषि और खाद्य उत्पादों पर भारत के औसतन 36 प्रतिशत से अधिक टैरिफ घटाए या हटाए जाएंगे। वाइन पर टैरिफ 150 से घटकर पहले 75 और बाद में 20 प्रतिशत किया जाएगा। ऑलिव ऑयल पर टैरिफ 45 प्रतिशत से घटकर अगले 5 साल में शून्य करने, ब्रेड और कन्फेक्शनरी जैसे प्रोसेस्ड फूड पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ खत्म किया जाएगा। हालांकि, EU के कृषि सेक्टर (बीफ, चिकन, चावल और चीनी) को संरक्षण दिया गया है।
व्यापार
कुल व्यापार पर असर
इस समझौते के तहत भारत में EU के 90 प्रतिशत से अधिक निर्यातित उत्पादों पर कम या शून्य टैरिफ लागू होंगे। अनुमान है कि इससे यूरोपीय निर्यातकों को सालाना करीब 4 अरब यूरो (लगभग 43,540 करोड़ रुपये) की बचत होगी, जिसका सीधा लाभ भारतीय उपभोक्ताओं और घरेलू उद्योगों होगा। यह समझौता भारत द्वारा किसी भी व्यापार साझेदार को दी गई अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक छूट है। इसलिए यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है।
साझेदारी
भारत-EU के बीच कितना है व्यापार?
EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर (करीब 12.28 लाख करोड़ रुपये) रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर (करीब 6.82 लाख करोड़ रुपये) और आयात 60.68 अरब डॉलर (करीब 5.46 लाख करोड़ रुपये) था। इसके अलावा, EU का भारत में अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक 117.4 अरब डॉलर (लगभग 10.56 लाख करोड़ रुपये) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) रहा है।