शी जिनपिंग 7 साल बाद जाएंगे उत्तर कोरिया, कितना अहम है दौरा?
क्या है खबर?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया का दौरा करने वाले हैं। वे 8 से 9 जून तक उत्तर कोरिया के तानाशाह नेता किम जोंग उन के निमंत्रण पर दौरा करेंगे। 2019 के बाद यह जिनपिंग की पहली उत्तर कोरिया यात्रा होगी। वर्तमान वैश्विक हालात, ईरान युद्ध और अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता के बीच इसे बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। आइए दौरे की अहमियत और मायने समझते हैं।
दौरा
कैसा रहेगा जिनपिंग का दौरा?
जिनपिंग राजधानी प्योंगयांग में किम जोंग उन के साथ मुलाकात करेंगे। जिनपिंग की ये इस साल की पहली विदेश यात्रा भी है, जिसके लिए उन्होंने अपने पड़ोसी देश को चुना है। इस दौरे से ठीक पहले जिनपिंग अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को चीन बुलाकर उनके साथ बैठकें कर चुके हैं। जिनपिंग ने आखिरी बार किम जोंग उन से सितंबर 2025 में बीजिंग में मुलाकात की थी।
समय
अभी ही क्यों उत्तर कोरिया जा रहे हैं जिनपिंग?
सियोल स्थित कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के हांग मिन ने कहा कि चीन उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ते करीबी संबंधों पर लगाम लगाकर संतुलन बनाए रखना चाहता है। जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले किम ने परमाणु बम बनाने से जुड़े एक संयंत्र का उद्घाटन किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिनपिंग के दौरे से पहले किम अपने देश को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में स्थापित करने के लिए उत्सुक थे।
उत्तर कोरिया
दौरे के उत्तर कोरिया के लिए क्या हैं मायने?
सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के जेम्स चार के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास किसी प्रमुख शक्ति द्वारा राजनयिक मान्यता प्राप्त करने के कम विकल्प हैं और वह चीन से ज्यादा विकास सहायता कीे मांग कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किम परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहते हैं ताकि प्रतिबंध हटवाए जा सके। इसके बाद वे परमाणु क्षमता कम करने के बदले रियायतें हासिल करते हुए अमेरिका के साथ वार्ता आगे बढ़ाएंगे।
अहमियत
उत्तर कोरिया के लिए कितना अहम है चीन?
उत्तर कोरिया के लिए राजनीतिक और आर्थिक मदद का बड़ा स्त्रोत चीन है, चूंकि वो दुनिया के सबसे ज्यादा कूटनीतिक रूप से अलग-थलग देशों में से एक है और उस पर बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं। ऐसे में वो अपने कुल व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत चीन के साथ करता है। साथ ही देश के कुल निर्यात का लगभग 85 प्रतिशत चीन को जाता है। दोनों देश करीब 1,400 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं।