
किन विवादों से रहा है ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का नाता?
क्या है खबर?
ऋषि सुनक को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया है। वह इस कुर्सी तक पहुंचने वाले भारतीय मूल के पहले शख्स हैं। उन्होंने आज ब्रिटिश महाराज किंग चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात कर ली है।
सुनक के सामने अब देश की अर्थव्यवस्था को फिर पटरी पर लाने सहित कई अन्य चुनौतियां हैं।
वह उनका सामना कैसे करेंगे यह तो समय ही बताएगा, लेकिन उससे पहले उनसे जुड़े प्रमुख विवादों पर नजर डालते हैं जिन पर काफी बवाल मचा था।
सफलता
सुनक को कैसे मिली सफलता?
प्रधानमंत्री बनने की रेस में उनका मुकाबला बोरिस जॉनसन और पेन्नी मॉरडोन्ट से था, लेकिन ये दोनों चुनाव के लिए आवश्यक 100 सांसदों का समर्थन नहीं जुटा सके।
इसके चलते पहले जॉनसन और फिर मॉरडोन्ट ने नाम वापस ले लिया। ऐसे में सुनक को प्रधानमंत्री चुन लिया गया।
उन्हें पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल, कैबिनेट मंत्री जेम्स क्लेवर्ली और नदीम जहावी सहित 190 सांसदों ने समर्थन दिया था। पटेल ने तो उन्हें नेतृत्व का मौका देने की अपील की थी।
#1
पत्नी अक्षता की नागरिकता को लेकर उठा विवाद
इस साल की शुरुआत में सुनक और उनकी पत्नी अक्षता को ब्रिटेन के 250 सबसे धनी लोगों की सूची में शामिल किया गया था। उनकी कुल संपत्ति 730 मिलियन पाउंड (करीब 68 अरब रुपये) आंकी गई थी।
इसी बीच यह भी सामने आया कि उनकी पत्नी अक्षता गैर-अधिवास (नॉन डोमिसाइल) दर्जा प्राप्त है और इसके चलते उन्हें अपनी कमाई पर ब्रिटेन में टैक्स नहीं भरना पड़ता।
इसको लेकर पूरे ब्रिटेन में टैक्स का विवाद खड़ा हो गया था।
सफाई
सुनक के प्रवक्ता ने दी थी सफाई
इस मामले में देश में बढ़ते आक्रोश के कारण सुनक के प्रवक्ता ने सफाई जारी करते हुए कहा था कि अक्षता को गैर-अधिवास दर्जा उनके पास भारतीय नागरिकता होने के कारण दिया गया है। कोई भी भारतीय नागरिक दो देशों की नागरिकता नहीं रख सकता है।
हालांकि, इसके बाद भी लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और अक्षता ने बयान जारी कर अपनी सभी वैश्विक आय पर ब्रिटेन के टैक्स का भुगतान करने की बात कही थी।
जानकारी
गैर-अधिवास दर्जे के लिए सालाना 30,000 पाउंड का देती है अक्षता
बता दें कि अक्षता अपना गैर-अधिवास दर्जा बनाए रखने के लिए हर साल 30,000 पाउंड का भुगतान करती हैं। इससे उन्हें यूनाइटेड किंगडम (UK) में उनकी वैश्विक आय पर लगने वाले टैक्स से छूट दी जाती है। हालांकि, यह विवाद का कारण रहा है।
#2
अमेरिका का ग्रीन कार्ड रखने को लेकर विवाद
गैर-अधिवास दर्जे के विवाद के बीच सामने आया था कि सुनक के पास अक्टूबर 2021 तक का अमेरिका ग्रीन कार्ड था।
इस पर लिबरल डेमोक्रेट के सर एड डेवी ने कहा था कि ग्रीन कार्ड की परवाह न करें, सुनक को रेड कार्ड दिखाने का समय आ गया है।
ग्रीन कार्ड से टैक्स में तो छूट नहीं मिलती है, लेकिन यह संकेत था कि राजनीतिक करियर में विफल होने पर सुनक के पास अमेरिका जाने के रास्ते खुले हैं।
#3
मजदूर वर्ग के दोस्त न होने के बयान पर छिड़ा विवाद
BBC की डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'मिडिल क्लासेस: देयर राइज एंड स्प्रेल' में सुनक द्वारा दिए गए बयान ने भी उन्हें विवादों में ला लिया था।
साल 2001 की डॉक्यूमेंट्री सीरीज के समय सुनक 21 साल के थे। इसमें उन्होंने कहा था, "मेरे पास ऐसे दोस्त हैं जो कुलीन हैं, मेरे पास उच्च वर्ग के दोस्त हैं। मेरे पास मजदूर वर्ग के भी दोस्त नहीं हैं।"
उनका यह वीडियो हालिया चुनाव में वायरल हुआ था। लेबर पार्टी ने उनकी आलोचना की थी।
#4
अक्षता की कंपनी के रूस में निवेश पर निशाना बने सुनक
यूक्रेन पर हमले के बाद से सभी यूरोपीय देश रूस के खिलाफ हो गए और ब्रिटेन ने कई प्रतिबंध लगाए हैं।
हाल ही में सुनक ने ब्रिटिश फर्मों से रूस में निवेश या कंपनियां बंद करने की अपील की थी। हालांकि, उनकी पत्नी अक्षता के कारण वह विवादों में आ गए।
दरअसल, अक्षता की कंपनी इंफोसिस पर रूस में सेवा जारी रखने का आरोप लगा था। अक्षता ने रूस में निवेश या कंपनी बंद करने से इनकार कर दिया था।
आलोचना
यूक्रेन और कई सांसदों ने की थी आलोचना
अक्षता के अपनी कंपनी के रुख को लेकर यूक्रेन ने न केवल उनकी आलोचना की, बल्कि उनके पति सुनक को भी निशाने पर ले लिया था।
इसी तरह सांसद लेसिया वालिलेंको ने द गार्जियन के हवाले से कहा था कि हर कंपनी के पास विकल्प होता है कि वह व्यवसाय चला सकती है और पैसा कमा सकती है, लेकिन कंपनी इस तथ्य के साथ भी रहना होगा कि यह खूनी पैसा है और खूनी व्यापार है। इससे बचा जाना चाहिए।
#5
रोटी की कीमत पर बवाल
ब्रिटेन में बढ़ती महंगाई को लेकर सुनक ने रोटी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके घर में सदस्यों की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग तरह की रोटी होती हैं, लेकिन उन्हें महंगाई को लेकर चिंता है। इस बयान पर सुनक की आलोचना हुई थी।
एक नेता जिम मैकमोहन ने कहा था कि सुनक को महंगाई का अंदाजा नहीं है। संबंधित मंत्रालय का प्रमुख होने के नाते उनके पास इसका समाधान होना चाहिए।