ट्रंप और रुबियो के दावों के बावजूद ईरान-अमेरिका में क्यों नहीं हुआ समझौता, कहां फंसा पेच?
क्या है खबर?
कई हफ्तों की चर्चा और सफलता के दावों के बावजूद अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर अभी तक कुछ घोषणा नहीं हुई है। कल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि समझौते का ढांचा 'काफी हद तक' तैयार कर लिया गया है। इसके बाद भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा था कि कुछ ही घंटों में घोषणा हो सकती है। हालांकि, अभी तक कोई ऐलान नहीं हुआ।
समझौता
समझौते के बारे में क्या-क्या पता है?
प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने , युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू होने के प्रावधान हैं। ईरान का कहना है कि कई प्रमुख विवाद अभी भी अनसुलझे हैं। उसने कहा कि वह होर्मुज पर नियंत्रण नहीं छोड़ेगा और अमेरिका को संवर्धित यूरेनियम भी नहीं सौंपेगा। दोनों पक्ष बातचीत में प्रगति होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह भी कह रहे हैं कि कई मुद्दों पर अभी भी असहमति है।
होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर मतभेद
अमेरिका होर्मुज से बिना किसी प्रतिबंध के जहाजों की निर्बाध आवाजाही चाहता है, जबकि ईरान जलमार्ग पर नियंत्रण और निगरानी बनाए रखना चाहता है। ईरान कथित तौर पर यहां से निकलने वाले जहाजों से टोल वसूलने की योजना भी बना रहा है। अमेरिका ने कहा है कि उसे किसी भी शर्त पर ये मंजूर नहीं है। ईरान ने अपने बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को भी हटवाने की मांग की है।
परमाणु कार्यक्रम
परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर भी विवाद
अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद कर दे और जो भी संवर्धित यूरेनियम उसके पास है, वो छोड़ दे। ईरान इस पर बिल्कुल सहमत नहीं है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्किया ने कहा है कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। बीच में खबर आई थी कि अमेरिका हमेशा के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद करवाना चाहता है, लेकिन ईरान ने कुछ सालों के लिए रोक पर सहमति जताई थी।
प्रतिबंध
इन मुद्दों पर भी मतभेद
ईरान चाहता है कि अमेरिका प्रतिबंधों में ढील दे और फ्रीज किए हुए ईरानी फंड तुरंत जारी करे। अमेरिका कहना है कि राहत तभी मिलेगी, जब ईरान शर्तें पूरी करेगा। ईरान पहले प्रतिबंध हटवाना चाहता है, लेकिन अमेरिका कह रहा है कि तेहरान को पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा और परमाणु शर्तों को पूरा करना होगा, इसके बाद ही चर्चा आगे बढ़ेगी। यानी मतभेद इस बात पर भी हैं कि पहले कौन झुकेगा।
मुद्दे
समझौते में केवल रूपरेखा पर चर्चा, बारीक मुद्दे अभी भी अनसुलझे
फिलहाल जिस समझौते की बात की जा रही है, वो केवल एक रूपरेखा या समझौता ज्ञापन (MoU) है। इसमें केवल फिलहाल के मुद्दों पर ध्यान दिया गया है और जटिल मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए स्थगित कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्धविराम की 60 दिन की अवधि के दौरान परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम को लेकर अगले दौर में चर्चा की जाएगी। वर्तमान समझौते में इससे जुड़े विस्तृत पहलू नहीं हैं।