अमेरिकी सेना 1950-1953 के बाद फिर खोद रही सामूहिक कब्रें, क्या बड़ा युद्ध होने वाला है?
क्या है खबर?
अमेरिका की सेना ने एक बार फिर सैनिकों को सामूहिक रूप से कब्र में दफनाने के लिए अभ्यास शुरू कर दिया है। न्यूजवीक के मुताबिक, उत्तरी कैरोलिना में एक अभ्यास के दौरान, इंजीनियरों, चिकित्सा टीमों, सुविधा प्रबंधन विशेषज्ञ ने बड़े पैमाने पर अस्थायी तौर पर दफनाने की तैयारी की है। अभ्यास में बुलडोजर समेत अन्य भारी उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है, ताकि कम समय में दफनाने के लिए कब्र तैयार की जा सके।
अभ्यास
इस अभ्यास का क्या मतलब है?
उत्तरी कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में किया जा रहा यह अभ्यास इस बात पर फोकस करता है कि सैनिक कितनी जल्दी अस्थायी युद्ध मैदान में कब्रें बना सकते हैं, ताकि मरे हुए लोगों की पहचान करने और उनके परिवार वालों को उनके अवशेष लौटाने की गुंजाइश भी बनी रहे।
अभ्यास में 20 सैनिकों के लिए एक कब्र खोदने में 75 मिनट लगते हैं। अभ्यास के दौरान 24 घंटे में 2400 सैनिकों को दफनाने का प्रशिक्षण चल रहा है।
अभ्यास
कोरियाई युद्ध के बाद हो रहा अभ्यास
अमेरिकी सेना यह अभ्यास 1950-1953 के कोरियाई युद्ध के बाद अब कर रही है, जिसमें 37,000 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।
सेना ने एक बयान में कहा कि कोरियाई युद्ध के बाद से अमेरिका को बड़े पैमाने पर ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ी।
इससे पहले सेना ने इराक और अफगानिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान सेना ने बड़ी-बड़ी अस्थायी कब्रें नहीं खोदी थी, बल्कि मरे हुए सैनिकों को जल्दी से वापस अमेरिका लाया गया था।
युद्ध
सैनिकों का शव इन मामलों में नहीं आ सकता वापस
वैसे अमेरिका युद्ध के समय मारे गए सैनिकों के शवों को वापस लाने की जरूरत बताता है, लेकिन वह बड़े पैमाने पर मौत के दौरान अस्थायी कब्र की इजाजत भी देता है।
इसका इस्तेमाल तब और जरूरी हो जाता है, जब सुरक्षा, परिवहन की कमी के अलावा, केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल या परमाणु हथियारों से हुई मौतों से शवों को वापस लाने में समस्या होती है।
अमेरिकी सेना के सभी स्तर के कमांडर शवों की देखभाल के लिए जिम्मेदार होते हैं।
युद्ध
क्या बड़ा युद्ध छिड़ने की तैयारी है?
ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका का यह निर्णय चौंकाने वाला है।
इससे पहले सेना देश के भीतर के सैनिक ठिकानों को 3 महीने बिना बिजली, इंटरनेट और बाहर से खाना-पानी आपूर्ति के काम करने की तैयारी का आदेश दिया है।
यूरोपीय संघ समेत 30 से अधिक देशों में भी आम लोगों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है।
अमेरिका मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है।