PoK में हिंसा में 30 मौतें, भारत-पाकिस्तान में क्यों छिड़ी जुबानी जंग?
क्या है खबर?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) हालिया सालों के सबसे भीषण हिंसा के दौर से गुजर रहा है। इस हिंसा में अब तक 30 लोगों की मौत हो गई है और 200 से ज्यादा घायल हुए हैं। मृतकों में 4 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हिंसा के चलते पाकिस्तान के लिए राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। भारत ने भी पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है। आइए पूरा मामला समझते हैं।
हिंसा
सबसे पहले हिंसा के बारे में जानिए
रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा में 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, झड़पों के बाद अधिकारियों ने कई क्षेत्रों में प्रतिबंध लगा दिए हैं, क्षेत्र के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की गई है। हिंसा से सबसे ज्यादा रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद प्रभावित हुए हैं।
वजह
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। ये 2025 में भी बिजली की बढ़ती लागत, गेहूं की कीमतों और व्यापक आर्थिक शिकायतों को लेकर बड़ा प्रदर्शन कर चुकी है। हालिया प्रदर्शन विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर हो रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग कर रहा है।
पाकिस्तान
हिंसा पर पाकिस्तान क्या कह रहा है?
पाकिस्तान ने इस अशांति को मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था की चुनौती के रूप में पेश किया है। अधिकारियों ने JAAC पर प्रतिबंध लगाने, तैनाती बढ़ाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के फैसले का बचाव किया है। कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह आरोप लगाया है कि आंदोलन के कुछ तत्व शत्रुतापूर्ण विदेशी ताकतों से संबंध रखते हैं। वहीं, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार बातचीत के लिए तैयार है।
भारत
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की ये अपील
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हत्याओं की निंदा की और पाकिस्तान पर क्षेत्र में असहमति को दबाने का आरोप लगाया। जायसवाल ने कहा, "पाकिस्तान द्वारा अपनी आंतरिक विफलताओं के लिए भारत को दोषी ठहराने के प्रयास विफल होने वाले हैं।" भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस स्थिति पर ध्यान देने का आग्रह किया है। जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के गलत कामों और मानवाधिकार उल्लंघन के लिए उसे जवाबदेह ठहराएगा।
विशेषज्ञ
प्रदर्शन को विशेषज्ञ कैसे देख रहे हैं?
विश्लेषकों का कहना है कि ये विरोध प्रदर्शन शासन, आर्थिक कठिनाई, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय संस्थानों और इस्लामाबाद के बीच संबंधों में उथल-पुछल को दर्शाते हैं। यह आंदोलन मूल रूप से आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित था, अब एक राजनीतिक टकराव में बदल गया है, जो PoK में सरकार के प्रति जनता की हताशा को दिखाता है। जानकारों का मानना है कि अगर गिरफ्तारियां और प्रतिबंध जारी रहते हैं, तो अशांति और भी बढ़ सकती है।
पिछली हिंसा
पिछले साल भी हुए थे प्रदर्शन
पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में भी PoK में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए थे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व भी JAAC कर रही थी। तब लोग महंगाई, बेरोजगारी और पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। तब धीरकोट, मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली, रावलकोट, केरन और नीलम घाटी में हिंसा फैली थी। प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोकने के लिए रखे कंटेनरों को नदी में फेंक दिया था।