क्या है 'गाजा शांति बोर्ड', जिसमें शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बुलाया गया?
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीन में गाजा युद्ध समाप्त करने के लिए जो 20-सूत्रीय योजना बनाई थी, उसका दूसरा चरण शुरू होने वाला है। इसके लिए ट्रंप ने 'गाजा शांति बोर्ड' बनाया है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समर्थित योजना के रूप में इस नए शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दुनियाभर के राजनीतिक नेताओं और प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया गया है। ये बोर्ड क्या है और इसमें किन हस्तियों को आमंत्रित किया गया? आइए, जानते हैं।
बोर्ड
क्या है गाजा शांति बोर्ड?
इजरायल और हमास ने गाजा पट्टी में युद्ध विराम के लिए अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षर किए थे। उसी के तहत दूसरे चरण में 'शांति बोर्ड' का अनावरण हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जिसे इजरायल-हमास युद्ध विराम की निगरानी के लिए नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अनुमोदित किया था। इसमें 3 परस्पर संबंधित निकाय, जिसमें मुख्य शांति बोर्ड, गाजा में शासन के लिए फिलिस्तीनी तकनीकी समिति और सलाहकार या सहायक भूमिका वाला गाजा कार्यकारी बोर्ड शामिल है।
अध्यक्षता
ट्रंप करेंगे जीवनभर अध्यक्षता
इस बोर्ड की अध्यक्षता राष्ट्रपति ट्रंप जीवनभर के लिए करेंगे। इसकी शुरुआत गाजा संघर्ष को संबोधित करने और विस्तार अन्य संघर्षों से निपटने के लिए किया जाएगा। बोर्ड में शामिल सदस्य देशों का कार्यकाल 3 साल तक सीमित रहेगा, जब तक वे बोर्ड की गतिविधियों के वित्तपोषण और स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर (90.8 अरब रुपये) का भुगतान नहीं करते। समूह का उद्देश्य पूरे गाजा का पुनर्निर्माण और जुटाया गया हर डॉलर इसी उद्देश्य पर खर्च किया जाएगा।
बोर्ड
मुख्य शांति बोर्ड में कौन-कौन सदस्य?
शांति का मुख्य बोर्ड शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंधों, पुनर्निर्माण, निवेश और बड़े पैमाने पर वित्तपोषण पर केंद्रित होगा। इसमें ट्रंप के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के 1997 से 2007 तक प्रधानमंत्री रहे टोनी ब्लेयर, अमेरिकी अरबपति फाइनेंसर मार्क रोवन, विश्व बैंक के अध्यक्ष भारतीय मूल के अजय बंगा और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में ट्रंप के एक सहयोगी रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं।
बोर्ड
गाजा कार्यकारी बोर्ड में कौन-कौन शामिल?
गाजा में शासन और सेवा वितरण में सहयोग देने के लिए गठित गाजा कार्यकारी बोर्ड में स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, टोनी ब्लेयर, मार्क रोवन, बल्गेरियाई राजनयिक निकोले म्लाडेनोव, गाजा के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी समन्वयक सिग्रीड काग, तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फ़िदान, कतरी राजनयिक अली अल-थवाडी, मिस्र के खुफिया प्रमुख जनरल हसन रशाद, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) मंत्री रीम अल-हाशिमी और इजरायली अरबपति याकिर गबे शामिल हैं। इसी बोर्ड के लिए कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं को आमंत्रित किया गया है।
आमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी को भी किया गया आमंत्रित
ट्रंप ने गाजा कार्यकारी बोर्ड में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है। पत्र में लिखा है, "भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर, मध्य पूर्व में शांति के लिए एक बहुत ऐतिहासिक और शानदार कोशिश में मेरे साथ शामिल होने और वैश्विक झगड़े को सुलझाने के लिए हिम्मत वाले तरीके को अपनाने के लिए आपको आमंत्रित करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है!" हालांकि, अभी भारत ने इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया।
आमंत्रण
पाकिस्तान समेत इन देशों को भी गया है आमंत्रण
कई वैश्विक नेताओं ने इस प्रयास में शामिल होने के लिए आमंत्रण पाने का दावा किया है, जिसमें अल्बानियाई प्रधानमंत्री एडी रामा, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई, ब्राजीली राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी, इटली प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, मिस्र राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने इस पहल के लिए भारत-पाकिस्तान समेत लगभग 60 देशों को ऐसा आमंत्रण भेजा है।
चिंता
संयुक्त राष्ट्र की बढ़ गई चिंता
ट्रंप के इस पहल से संयुक्त राष्ट्र की चिंता बढ़ गई है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शांति बोर्ड का कार्यकाल केवल 2027 तक अधिकृत किया था और इसका पूरा ध्यान गाजा संघर्ष पर केंद्रित था। आमंत्रण पत्र में गाजा युद्ध से परे विस्तार योजनाओं से संबंधित एक चार्टर को शामिल करने कुछ यूरोपीय सरकारें भी चिंतित हैं। उनका मानना है कि इससे संयुक्त राष्ट्र के काम को नुकसान पहुंचेगा। कुछ राजनयिक इसे 'ट्रंप संयुक्त राष्ट्र' बता रहे हैं।