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ईरान को युद्धविराम प्रस्ताव 'बेचने' के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान पर बनाया था दबाव- रिपोर्ट
ईरान को युद्धविराम प्रस्ताव 'बेचने' को लेकर एक रिपोर्ट ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं (फाइल तस्वीर)

ईरान को युद्धविराम प्रस्ताव 'बेचने' के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान पर बनाया था दबाव- रिपोर्ट

लेखन आबिद खान
Apr 09, 2026
01:21 pm

क्या है खबर?

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव डाला था कि वह ईरान के साथ एक अस्थायी युद्धविराम की मध्यस्थता करे। फाइनेंशियल टाइम्स की इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान के स्वतंत्र कूटनीतिक रुख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान कोई तटस्थ मध्यस्थ नहीं था, बल्कि अमेरिका के लिए अस्थायी युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने का केवल एक जरिया था।

रिपोर्ट

पाकिस्तान को प्रस्ताव 'बेचने' की दी गई थी जिम्मेदारी- रिपोर्ट

रिपोर्ट में घटनाक्रम से परिचित लोगों का हवाला देते हुए कहा गया है कि हफ्तों तक ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर युद्धविराम के लिए दबाव डालता रहा, ताकि वह ईरानियों को लड़ाई रोकने के लिए राजी कर सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है, "एक मुस्लिम-बहुल पड़ोसी और मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की अहम भूमिका यह थी कि वह इस प्रस्ताव को तेहरान को 'बेचे'।"

क्षमता

रिपोर्ट में दावा- ईरानी शासन की दृढ़ता से हैरान थे ट्रंप

रिपोर्ट में युद्धविराम बातचीत से परिचित लोगों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित थे और ईरानी शासन की दृढ़ता या मुश्किलों के बावजूद टिके रहने की क्षमता को देखकर हैरान थे। युद्धविराम की घोषणा से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो वह पूरी सभ्यता को तबाह कर देंगे।

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सेना

मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान को ही क्यों चुना गया?

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी कमांडर इन चीफ 21 मार्च को ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को खत्म करने की पहली धमकी के बाद से ही युद्धविराम के लिए उत्सुक थे। वहीं, रिपोर्ट में मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान का चयन करने के पीछे की वजह भी बताई गई है। अमेरिका और पाकिस्तान का मानना था कि ईरान के उस प्रस्ताव को स्वीकार करने की ज्यादा संभावना थी, जो किसी तटस्थ मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश द्वारा दिया गया हो।

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IRGC

युद्धविराम के लिए राजी नहीं थी IRGC

बातचीत से जुड़े लोगों ने बताया कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और तेहरान के अन्य राजनीतिक नेताओं ने कुछ दिन पहले ही होर्मुज के लिए अस्थायी युद्धविराम पर सैद्धांतिक रूप से सहमति दे दी थी। हालांकि, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इस पर सहमत नहीं थी। सूत्रों ने बताया कि ईरानी सेना के एक तबका युद्ध खत्म करने, जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण ढीला करने और अमेरिका के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के सख्त खिलाफ था।

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