पश्चिम एशिया में 10,000 और सैनिक भेज सकता है अमेरिका, ईरान भी कर रहा तैयारी
क्या है खबर?
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर कुछ-कुछ बातचीत हो रही है, लेकिन दोनों ही देश जमीनी अभियान को लेकर अपनी-अपनी योजनाएं बनाने में जुटे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पश्चिम एशिया में 10,000 और सैनिकों को तैनात करने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, ईरान भी संभावित जमीनी जंग के लिए 10 लाख से ज्यादा लड़ाकों को जुटा रहा है। ईरान में भर्ती केंद्रों पर युवाओं की भीड़ उमड़ रही है।
रिपोर्ट
क्यों तैनाती बढ़ाने पर विचार कर रहे ट्रंप?
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप जिन 10,000 सैनिकों को तैनात करने पर विचार कर रहे हैं, उनमें संभवतः पैदल सेना और बख्तरबंद वाहन शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इससे ट्रंप को ज्यादा सैन्य विकल्प मिलेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत विफल होने की स्थिति में ट्रंप ईरान पर हमला करने या कम से कम खार्ग द्वीप जैसे अहम ऊर्जा अवसंरचना पर कब्जा करने का फैसला ले सकते हैं।
ईरान
10 लाख सैनिक तैयार कर रहा ईरान
तस्नीम समाचार एजेंसी ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान ने 10 लाख सैन्य बलों को संगठित कर लिया है और वे लड़ाई के लिए तैयार हैं। यह स्थिति बासिज, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और सेना द्वारा चलाए जा रहे भर्ती केंद्रों पर नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ने के बाद बनी है। एजेंसी ने कहा कि ईरानी लड़ाकों में ईरानी धरती पर अमेरिकियों के लिए 'ऐतिहासिक नरक' बनाने का जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
हथियार
अमेरिका के पास हथियारों की कमी की खबरें
द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के आक्रामक और रक्षात्मक हथियारों का भंडार कम होता जा रहा है। इसकी वजह से सेना को पुराने और कम सटीक गोला-बारूद का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जिन्हें 'डंब बम' कहा जाता है। संघर्ष के शुरुआती 16 दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मिलकर कथित तौर पर 11,000 गोला-बारूद का इस्तेमाल किया, जिनकी कुल कीमत लगभग 24 लाख करोड़ रुपये थी।
अंतिम प्रहार
ईरान पर 'अंतिम प्रहार' की तैयारी में जुटा अमेरिका
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर संभावित 'अंतिम प्रहार' के लिए सैन्य योजनाएं तैयार कर रहा है, जिसमें जमीनी बलों की तैनाती और बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शामिल हो सकते हैं। जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें खार्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने में सहायक लार्क द्वीप को निशाना बनाना शामिल है। इसके अलावा अबू मूसा और आसपास के द्वीपों पर नियंत्रण करना या ईरानी तेल निर्यात करने वाले जहाजों को रोकना शामिल है।