यूरोप में भीषण गर्मी की वजह से 50,000 लोगों की जान गई, 65 प्रतिशत के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार
यूरोप में इस बार भीषण गर्मी ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। अब एक नए अध्ययन में सामने आया है कि यूरोप में इस बार की भीषण गर्मी की वजह से बड़े शहरों में करीब 50,000 लोगों की जान गई है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मौतों में से 65 प्रतिशत सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के कारण हुईं। माल्टा, इटली और हंगरी जैसे देशों को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ा, क्योंकि लगातार पड़ रही हीटवेव से कमजोर लोगों को कोई राहत नहीं मिल पाई।
फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में तो पहली बार वातानुकूलित मशीनें और पंखें खरीदने के लिए बाजारों में भीड़ दिखी।
विशेषज्ञ: अकेलेपन और गरीबी ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
अध्ययन से पता चला है कि इस गर्मी में गर्मी से जुड़ी 65 प्रतिशत मौतें मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण हुईं। यह सदी की शुरुआत में रहे 40 प्रतिशत के आंकड़े से बहुत ज्यादा है।
इन मौतों में सबसे ज्यादा संख्या इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन में दर्ज की गई। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अकेलेपन और गरीबी ने कुछ तबकों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दीं हैं।
इसका सीधा कारण अल नीनो को बताया जा रहा है, जिसके कारण इस साल कई मौतों की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञ: उत्सर्जन कम करने और बेहतर सहायता तंत्र की ज़रूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जीवाश्म ईंधन का उत्सर्जन तेजी से कम करके और शहरों को ज्यादा हरा-भरा बनाकर लोगों को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने मामले में तेजी से काम करने की सलाह दी है।
वे इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि बेहतर सहायता तंत्र बनाए जाएं, ताकि जब अगली बार ऐसा खराब मौसम आए, तो जो लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं, वे अकेले न पड़ें।
बता दें कि इस साल भीषण गर्मी की चेतावनी यूरोपीय देशों के अलावा कई अन्य देशों के लिए जारी की गई थी।