
जापान के साथ E10 बुलेट ट्रेनों को लेकर हो सकता है समझौता, जानें इनकी खासियत
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिवसीय जापान दौरे पर हैं। वहां उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ बातचीत की। इस दौरान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी चर्चा हुई। इन दोनों शहरों के बीच जापान की E-10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन को चलाने की योजना है। ये ट्रेन 320 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। इससे मुंबई से अहमदाबाद का सफर करीब 2 घंटे में पूरा हो सकेगा। आइए इन ट्रेनों की खासियत जानते हैं।
डिजाइन
कैसी है E10 बुलेट ट्रेन?
E10 सीरिज की बुलेट ट्रेनों का डिजाइन प्रसिद्ध सकुरा या चेरी ब्लॉसम फूलों से प्रेरित है। ये ट्रेन भूकंप-रोधी है। यानी भूकंप आने पर इन ट्रेनों को कुछ नहीं होगा। शुरुआत में भारत की योजना E5 शिंकानसेन सीरिज की ट्रेन खरीदने की थी, लेकिन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी हुई और इस बीच जापान में नई तकनीक आ गई तो उसने भारत को अगली पीढ़ी के E10 ट्रेन सौंपने का ऑफर दिया है।
खासियत
क्या है E10 ट्रेनों की खासियत?
भूकंप के दौरान ट्रेन को पटरी से उतरने से रोकने के लिए E10 में 'L-आकार के वाहन गाइड' का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कंपन और झटकों को कम करने और नुकसान को सीमित करने के लिए लेटेर्ल्स डैम्पर्स भी हैं, जो पटरी से उतरने से रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं। E5 ट्रेनों की तुलना में E10 में सामान रखने के लिए ज्यादा जगह, दिव्यांगों के लिए विशेष खिड़की वाली सीटें और एक नया सीटिंग लेआउट होगा।
बेहतर
E3 और E5 से कितनी बेहतर है E10
E5 2011 में लॉन्च किया गया था। इसके अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा है। कुल 10 कोच की एक ट्रेन में 730 यात्री सफर कर सकते हैं। E3 1997 में लॉन्च किया गया था। इसमें 6 या 7 कोच होते हैं, जिनमें करीब 350 यात्री बैठ सकते हैं। इसकी अधिकतम गति 275 किलोमीटर प्रति घंटा है। E10 की अधिकतम गति E5 जितनी ही है, लेकिन इसमें आधुनिक ब्रेक सिस्टम और उन्नत इंजन लगा है।
शुरुआत
2027 में शुरू हो सकता है पहला चरण
14 सितंबर, 2017 को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का 352 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और 156 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में है। शुरुआती देरी के बाद अब काम में तेजी आई है। करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि 2027 तक गुजरात में पहले चरण का काम पूरा हो सकता है। वहीं, 2030 तक परियोजना पूरी होने की उम्मीद है।