ट्रंप को अपने ही सैन्यकर्मियों पर भरोसा नहीं? 50 से ज्यादा का कराया पॉलीग्राफ टेस्ट
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना के संयुक्त स्टाफ के 50 से ज्यादा कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है। ये कदम ऐसे वक्त उठाया गया है, जब ईरान युद्ध से जुड़ी अहम जानकारी मीडिया तक पहुंचाने के मामले में अमेरिका ने जांच तेज कर दी है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि इसी के तहत अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने करीब 50 संयुक्त स्टाफ सदस्यों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है।
रिपोर्ट
सैनिकों से पूछे गए ये सवाल
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 50 से ज्यादा कर्मियों का पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ है। इसमें सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई कि क्या उन्होंने मीडिया के साथ गोपनीय जानकारी साझा की थी।
जांचकर्ताओं ने यह भी पूछा कि क्या उन्होंने अमेरिकी गोला-बारूद के कम भंडार से संबंधित जानकारी को मीडिया में लीक किया।
ये कथित टेस्ट पिछले महीने किए गए थे। बता दें कि संयुक्त स्टाफ में 1,500 से 2,000 कर्मचारी हैं।
बयान
मामले पर पेंटागन के प्रवक्ता ने क्या कहा?
रिपोर्ट में पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल के हवाले से कहा गया है कि विभाग आंतरिक कर्मियों या जांच संबंधी मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी के सभी लीक को अत्यंत गंभीरता से लेता है और तदनुसार जांच करता है।
उन्होंने कहा, "गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखना संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया भर में तैनात हमारे सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।"
वजह
क्यों किया गया पॉलीग्राफ टेस्ट?
दरअसल, हाल ही में कई रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें कहा गया है कि ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका की सेना हथियारों की कमी का सामना कर रही है।
इन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना के पास गोला बारूद के साथ-साथ महत्वपूर्ण हथियारों, जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और पैट्रियट इंटरसेप्टर शामिल हैं, की कमी है। हालांकि, पेंटागन इनका खंडन करता रहा है।
टेस्ट
क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट?
पॉलीग्राफ टेस्ट को आम बोलचाल में 'लाई डिटेक्टर टेस्ट' के नाम से जाना जाता है। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति द्वारा बोले जा रहे झूठ को पकड़ने के लिए होता है।
टेस्ट में आरोपी से कुछ सवाल पूछे जाते हैं, जिनका जवाब देने पर उसके शरीर में होने वाली हलचल और गतिविधियों के आधार पर एक विशेष मशीन पर ग्राफ बनते हैं। इन्हें पॉलीग्राफ कहा जाता है और इससे पता चलता है कि आरोपी सच बोल रहा है या झूठ।