नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया, आर्थिक मदद मांगी
नेपाल ने चीन से लगी अपनी सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ के बाद दुनिया से मदद मांगी है। इस बाढ़ में 1,400 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और करीब 6,000 लोग लापता हैं।
इस आपदा से कुल 5 अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल के विदेश मंत्री शीशिर खनाल ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि कैसे हिमालयी ग्लेशियर लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं
नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र फंड से 2 करोड़ डॉलर की मदद मांगी
भले ही दुनिया के कुल उत्सर्जन में नेपाल का योगदान 0.1 प्रतिशत से भी कम है, फिर भी उसे जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है।
खनाल ने अमीर देशों से आगे बढ़कर मदद करने की गुजारिश की। नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के उस फंड से 2 करोड़ डॉलर की मांग की है, जो जलवायु आपदाओं में मदद के लिए बना है, लेकिन अभी भी उसमें पैसों की कमी है।
अमेरिका ने अब तक 3.10 करोड़ डॉलर की सहायता देने का वादा किया है। इसके अलावा, G-7 देशों ने भी अनौपचारिक रूप से मदद का आश्वासन दिया है, और ब्रिटेन ने भी सहयोग का भरोसा दिलाया है।
इसी बीच, नेपाल अपनी ग्लेशियर निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह भारत और चीन के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि इस क्षेत्र में रहने वाले कमजोर समुदायों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।