यूक्रेन पर युद्ध की दोहरी मार, हर घंटे हो रहा 432 करोड़ रुपये का घाटा
यूक्रेन को हर घंटे लगभग 4.5 करोड़ डॉलर (करीब 432 करोड़ रुपये) का बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि मिसाइल अलर्ट बजने पर अक्सर कारोबार ठप हो जाते हैं।
अर्थव्यवस्था मंत्री ओलेक्जेंडर क्रावचेंको का कहना है कि रूसी हमले अब फैक्ट्रियों और डेटा सेंटरों जैसे अहम ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इस वजह से देश की पहले से ही जूझ रही अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है।
इस अफरा-तफरी को संभालने के लिए, यूक्रेन ने एक दो-स्तरीय चेतावनी प्रणाली लागू की है। 'रेड अलर्ट' का मतलब है तुरंत सुरक्षित जगह पर छिप जाना, जबकि 'येलो अलर्ट' में कुछ काम करने की छूट मिलती है, लेकिन खतरा तब भी बना रहता है।
यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को 10 अरब डॉलर का नुकसान
इस साल युद्ध के कारण यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को अकेले 10 अरब डॉलर (करीब 960 अरब रुपये) का भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, काला सागर के बंदरगाह भी बंद पड़े हैं, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।
यूक्रेन एक बड़े बजटीय घाटे को भरने की कोशिश में लगा है। खर्चों में कटौती और देश के भीतर ही अतिरिक्त संसाधन जुटाकर इस घाटे को 27 अरब डॉलर से घटाकर 20 अरब डॉलर तक तो ले आया गया है, लेकिन देश को पटरी पर लाने के लिए उसे अभी भी तेजी से कर्ज और मजबूत साझेदारों की दरकार है।
यह सब तब हो रहा है जब यूक्रेन की सरकार अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। साथ ही, भ्रष्टाचार को लेकर चिंतित अपने सहयोगी देशों को भरोसा दिलाने में भी जुटी है।