होर्मुज के लिए ट्रंप योजना को झटका? ऑस्ट्रेलिया समेत इन देशों का जहाज भेजने से इनकार
क्या है खबर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए बनाई गई योजना को करारा झटका लगा है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद के लिए कई देशों से अपने युद्धपोत तैनात करने का आग्रह किया था, जिसे ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों ने इनकार कर दिया है। कुछ अमेरिकी सहयोगी देशों ने सावधानीपूर्वक अपनी प्रतिक्रिया दी है, जबकि कई ने सीधे तौर पर मना किया है।
अनुरोध
ट्रंप ने क्या किया था अनुरोध?
पिछले दिनों अमेरिकी अखबार ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी राष्ट्रपति ट्रंप संकरे तेल मार्ग होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही के लिए अपने सहयोगियों से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अगर दूसरे देश भी हमारे साथ निगरानी करें तो अच्छा होगा, हम मदद करेंगे। हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के इस छोटे से प्रयास में हमारी मदद नहीं करेगा।
प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप के अनुरोध पर क्या कहा?
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ABC को बताया कि जलडमरूमध्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, कैनबरा को जहाज भेजने के लिए नहीं कहा गया है और न ही वह ऐसा करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, "हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेजेंगे। हम जानते हैं कि यह कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए हमसे कहा गया है या जिसमें हम योगदान दे रहे हैं।"
बयान
जापान और दक्षिण कोरिया ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान मामले में संयम बरत रहा है और इस स्तर पर समुद्री सुरक्षा अभियानों पर विचार नहीं कर रहा। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पुष्टि की कि एस्कॉर्ट जहाजों को भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है, और जापान के कानूनी ढांचे के भीतर विकल्पों की अभी भी जांच की जा रही है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि वह कि कोई भी कदम सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद उठाएगा और वाशिंगटन से परामर्श करेगा।
प्रतिक्रिया
ब्रिटेन और कनाडा भी हट रहे पीछे
ब्रिटेन ने मामले पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा। वे कूटनीतिक रुख अपना रहे हैं। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने व्यवधानों को कम करने के लिए ट्रंप के साथ जलडमरूमध्य को खोलने की आवश्यकता पर चर्चा की है। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने बताया कि बर्लिन इस मिशन में शामिल होने के लिए अनिच्छुक है। फ्रांस और कनाडा ने अभी तक मामले में कोई रुख पेश नहीं किया है। अमेरिकी अधिकारी सहयोगियों से बातचीत में लगे हैं।