क्या ईरान गुपचुप तरीके से कर रहा परमाणु सुविधाओं की मरम्मत? सैटेलाइट तस्वीरों ने खोले राज
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान युद्धविराम टूटने और शांति वार्ता रुकने के बीच ऐसी खबर आ रही है, जो अमेरिका की नाराजगी बढ़ा सकती है। हाल ही में जारी सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने उस अहम परमाणु सुविधा को फिर से बनाना शुरू कर दिया है, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी हमलों में क्षतिग्रस्त हो गई थी। CNN ने इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) के साथ मिलकर ये तस्वीरें जारी की हैं।
तस्वीरें
पार्चिन सैन्य परिसर के अंदर चल रहा निर्माण कार्य
नई सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि पार्चिन सैन्य परिसर के अंदर 'तालेघन 2' अंडरग्राउंड फैसिलिटी में नए निर्माण कार्य हो रहे हैं।माना जाता है कि यहां परमाणु हथियारों से जुड़ी विस्फोटक सामग्री मौजूद है। ISIS के अनुसार, तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ईरान शुरुआती नुकसान का आकलन करने और मलबा हटाने से आगे बढ़ चुका है और उसने परिसर में स्थायी मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम शुरू कर दिया है।
मरम्मत
तस्वीरों में क्या दिख रहा है?
12 जून की तस्वीर में दिख रहा है कि ईरान ने बम से हुए 3 छेदों को अस्थायी रूप से ढक दिया है। साथ ही हमले के बाद बचे एकमात्र प्रवेश द्वार से अंदर जाने का रास्ता फिर बना लिया। 18 जून की एक तस्वीर में 'तालेघान 2' में सफाई होती दिख रही है। 22 जून की तस्वीर में मरम्मत होती दिख रही है। 7 जुलाई की तस्वीर में क्षतिग्रस्त छत के ऊपर एक क्रेन काम करती दिख रही है।
हमला
अमेरिका ने सुविधा पर 2 बार किए थे हमले
अमेरिका ने इस परिसर पर पहला हमला 11 मार्च को किया था। इसमें जमीन के नीचे बनी मुख्य सुविधा नष्ट हो गई थी। ISIS के अनुसार, अंदर हुए धमाके से ढांचे की सुरक्षा करने वाली दीवार गिर गई, जबकि शॉकवेव से एक नजदीकी इमारत भी ढह गई। वहीं, अलग-अलग हथियारों ने पास के 'तालेघन 1' परिसर से जुड़ी फायर-कंट्रोल और इंस्ट्रूमेंटेशन बिल्डिंग को भी नष्ट कर दिया। दूसरा हमला 24 मार्च से 1 अप्रैल के बीच किया गया था।
समझौता
ईरान का ये कदम अमेरिका संग समझौते का उल्लंघन है?
ईरान ने अमेरिका के साथ जो समझौता किया था, उसमें शर्त थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकेगा और परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में कहा गया है, "ईरान इस बात की पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार प्राप्त नहीं करेगा और न ही उनका विकास करेगा।" इसमें यह भी कहा गया है कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में संवर्धित यूरेनियम के मुद्दे को हल करने पर सहमत हुए हैं।