ईरान में अमेरिकी प्रतिबंधों से दवा सेक्टर तबाह, महंगाई से इलाज हुआ मुश्किल
ईरान का दवा सेक्टर इस वक्त गंभीर संकट से जूझ रहा है। अमेरिकी प्रतिबंध और हवाई हमलों के कारण दवाओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और इलाज मुश्किल हो गया है।
पिछले 7 महीनों में अमेरिका और इजरायल के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद से ही कई जरूरी दवाओं के दाम 3 गुना से भी अधिक बढ़ चुके हैं।
भले ही ईरान अपनी अधिकतर दवाएं खुद बनाता है, लेकिन इसके लिए उसे बाहर से कुछ कच्चा माल मंगवाना पड़ता है, लेकिन अब इस कच्चे माल का आयात पूरी तरह से ठप हो गया है।
नतीजा यह है कि देश भर की फार्मेसियों में जरूरी दवाओं की भारी कमी हो गई है, जिससे पहले से ही महंगाई झेल रहे ईरानी परिवारों की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।
हवाई हमलों से ईरानी दवा फैक्ट्रियां प्रभावित
हवाई हमलों में 40 से अधिक दवा फैक्ट्रियां तबाह हुई हैं, जिससे आपूर्ति की समस्या और भी गंभीर हो गई है।
बीमा के भुगतान में देरी के चलते फार्मेसियों के पास दवाओं का नया स्टॉक खरीदने के लिए पर्याप्त नकदी नहीं बच रहीं हैं। दर्द कम करने वाली मलहम जैसी आम दवाओं की कीमतें भी 4 गुना बढ़ गई हैं।
कुछ अस्पतालों का यह भी कहना है कि उनके पास तो मानसिक रोगियों की दवाएं भी खत्म होने की कगार पर हैं।
इस मुश्किल स्थिति से निपटने के लिए ईरान ने चीन से फ्लू के टीके मंगवाने शुरू किए हैं, लेकिन इनकी कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब दोगुनी हो गई है।
इन तमाम दिक्कतों के कारण इलाज की तलाश में जूझ रहे मरीजों पर बहुत अधिक दबाव है।