सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे लगाया 10 प्रतिशत टैरिफ?
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ मामले पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने इन टैरिफ को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ के लिए अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल राष्ट्रपति का नहीं, बल्कि संसद का अधिकार है। इसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। आइए जानते हैं ट्रंप ने ये टैरिफ कैसे लगाए हैं।
नया कानून
ट्रंप ने किस कानून के तहत लगाए नए टैरिफ?
ट्रंप ने सभी देशों पर जो 10 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं, वो 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत लगाए गए हैं। इन टैरिफ में कुछ सामानों को छूट दी गई है। इनमें जरूरी खनिज, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा उत्पाद, चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट, बीफ, खेती के सामान, ऑटोमोबाइल और पार्ट्स और अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच मौजूदा समझौते के तहत आने वाली चीजें शामिल हैं। यह टैरिफ 24 फरवरी से लागू होगा।
प्रावधान
क्या कहती है धारा 122?
धारा 122 अमेरिका के 1974 के व्यापार अधिनियम का हिस्सा है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे टैरिफ लगा सकते हैं। हालांकि, टैरिफ की दर 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती और ये अधिकतम 150 दिनों के लिए लागू रह सकता है। अमेरिकी संसद की मंजूरी के बिना ये अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती।
कोर्ट
150 दिन बाद टैरिफ का क्या होगा?
टैरिफ को 150 दिन से आगे बढ़ाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। अगर संसद मंजूरी नहीं देती है, तो ये टैरिफ अपने आप खत्म हो जाएंगे। हालांकि, इन टैरिफ को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है, क्योंकि इन्हें करीब 50 साल पहले की नीतियों के हिसाब से बनाया गया था। धारा 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है, इसलिए कोर्ट के लिए इसकी व्याख्या भी चुनौती होगी।
पिछले टैरिफ
पिछले टैरिफ किस कानून के तहत लगाए गए थे?
ट्रंप ने पिछले टैरिफ 1977 में बनाए गए IEEPA कानून का इस्तेमाल कर लगाए थे। उन्होंने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था। इस कानून के मुताबिक, अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध, आर्थिक खतरा या असाधारण संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां मिल सकती हैं। इसके तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकते हैं, उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकते हैं।
वसूला गया टैरिफ
जो टैरिफ वसूला जा चुका, उसका क्या होगा?
कोर्ट ने टैरिफ लौटाने को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि आयातकों को अपना पैसा वापिस मिल जाएगा और संभवत: अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय इसकी देखरेख करेगा। AP के अनुसार, टैरिफ वापसी की प्रक्रिया संभवतः अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी, न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार की विशेष कोर्ट और अन्य निचली अदालतों के संयुक्त प्रयासों के जरिए पूरी की जाएगी। ये प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है।