हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब पर कब्जा किया, ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब पाइपलाइन बंद
क्या है खबर?
होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद वैश्विक तेल परिवहन के लिए अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने यहां कब्जे का ऐलान किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि बाब अल-मंदेब के बीच स्थित पेरिम द्वीप पर हूतियों ने कब्जा कर लिया है। सारी ने दावा किया कि अब उनका 5,400 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा हो गया है।
कब्जा
हूतियों ने धुबाब शहर पर भी कब्जा किया
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एक हूती अधिकारी ने पुष्टि की कि हूतियों ने 'मायुन' या 'पेरिम' द्वीप पर कब्जा कर लिया है।
ये बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के अंदर स्थित एक छोटा, बंजर ज्वालामुखी द्वीप है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यमनी सरकार की सेनाएं पेरिम से हट गई हैं और हूतियों ने मुख्य भूमि पर लाल सागर के तट पर बसे शहर धुबाब पर भी कब्जा कर लिया है।
पाइपलाइन
ड्रोन हमले के बाद सऊदी की अहम तेल पाइपलाइन बंद
सऊदी अरब ने अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को ड्रोन हमले के बाद कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। गुरुवार को हुए ड्रोन हमले में पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशनों में आग लग गई थी और कुछ लोग घायल हुए थे।
सऊदी अरब के लिए इस पाइपलाइन का बेहद महत्व है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद सऊदी इसी पाइपलाइन से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था।
इराक
इराकी प्रधानमंत्री ने सैन्य कमांडर को बर्खास्त किया
सऊदी अरब ने कहा कि पाइपलाइन पर हमला करने वाले ड्रोन इराक से भेजे गए थे।
इसके बाद इराक ने एहतियात के तौर पर इराक और ईरान के बीच शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद करने का आदेश दिया है।
वहीं, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने अपनी धरती से ड्रोन दागे जाने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं और एक क्षेत्रीय सैन्य कमांडर को बर्खास्त कर दिया है।
प्लस
अब बाब अल-मंदेब के बारे में जानिए
बाब अल-मंदेब अरब प्रायद्वीप और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के बीच संकरा समुद्री मार्ग है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर या हिंद महासागर से जोड़ता है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर से स्वेज नहर तक का सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग है। यह हिंद महासागर से लाल सागर में प्रवेश करने का इकलौता रास्ता भी है।
यह स्वेज नहर से जुड़ता है, जिसके चलते ये एशिया और यूरोप के बीच सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग है।