डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को 'नरक का द्वार' कहा, ईरान बोला- भारत सभ्यता का उद्गम स्थल
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और विवादित बयान देते हुए भारत और चीन को नरक का द्वार बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी पोस्ट की है, जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता देने की आलोचना कर भारत और चीन समेत कई देशों पर निशाना साधा गया है। इस मामले पर ईरान ने भारत के समर्थन में बड़ा बयान दिया है। ईरान ने कहा कि भारत और चीन सभ्यताओं के उद्गम स्थल हैं।
बयान
ईरान ने कहा- भारत और चीन सभ्यता के पालने
हैदराबाद स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने ट्रंप के बयान को लेकर भारत का समर्थन किया है। दूतावास ने कहा, 'हर दिन एक नई पोस्ट के साथ ट्रंप की अमानवीयता अनंत से भी परे साबित होती है। यही तो असल नस्लवाद है। चीन और भारत सभ्यता के पालने हैं। असल में नरक का द्वार वह जगह है, जहां के युद्ध-अपराधी राष्ट्रपति ने ईरान की सभ्यता को तबाह करने की धमकी दी थी।'
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने क्या टिप्पणी की थी?
ट्रंप ने रूढ़िवादी टिप्पणीकार माइकल सैवेज के एक वीडियो क्लिप और एक पत्र को साझा किया है। इसमें उन्होंने अमेरिकी आव्रजन कानूनों और जन्मजात नागरिकता का जिक्र किया है। पत्र में कहा गया है कि अप्रवासी गर्भावस्था के अंतिम समय में अमेरिका में आकर व्यवस्था का दुरुपयोग करते हैं और यहां पैदा हुआ बच्चा तुरंत अमेरिकी नागरिक बन जाता है और फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत या किसी दूसरे 'नरक' जैसे देश से ले आते हैं।
कैलिफोर्निया
ट्रम्प बोले- कैलिफोर्निया में भारतीयों का दबदबा
ट्रंप ने पत्र में कैलिफोर्निया के तकनीकी जगत का जिक्र करते हुए कहा कि हाई-टेक नौकरियों में भारत और चीन के लोगों का बहुत ज्यादा असर है। उनके मुताबिक, वहां की कंपनियों में भर्ती का माहौल ऐसा बन गया है कि बाकी लोगों के लिए मौके बहुत कम रह गए हैं। ट्रंप ने आरोप लगाते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं और प्रक्रिया इस तरह काम करती है कि भारतीय और चीनी लोगों को प्राथमिकता मिलती है।
दावा
ट्रंप के पत्र की बड़ी बातें
ट्रंप ने पत्र में लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली अमेरिकन सिविल लिबर्टी यूनियन पर भी निशाना साधा और कहा कि यह संगठन अवैध प्रवासियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों का समर्थन करता है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिसका खर्च करदाताओं को उठाना पड़ता है। जन्मजात नागरिकता का फैसला जनता की राय से होना चाहिए।
नागरिकता
जन्मजात नागरिकता पर क्या कहता है अमेरिकी कानून?
अमेरिका अपनी सीमाओं के भीतर पैदा हुए बच्चों को नागरिकता प्रदान करता है, भले ही उनके माता-पिता की नागरिकता या अप्रवासी दर्जा कुछ भी हो। अमेरिका के संविधान में 9 जुलाई, 1868 को हुए 14वें संशोधन में नागरिकता खंड के पहले भाग में अमेरिकी क्षेत्र में जन्मे बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता की गारंटी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि अमेरिका में जन्मे या वहां नागरिक बने सभी लोगों के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार दिया जाएगा।