क्या समुद्र में बिछी केबलें काटकर पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद कर सकता है ईरान?
क्या है खबर?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। युद्ध के थमने के बजाय अब एक और नई चिंता उभरकर सामने आ रही है। ईरान ने पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार बाधित हुआ है। अब चिंता है कि ईरान पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद कर सकता है, क्योंकि होर्मुज में ही इंटरनेट के लिए जरूरी फाइबर ऑप्टिक केबलें बिछी हुई हैं।
बाब अल मंदेब
बाब अल-मंदेब में भी केबलें काट सकते हैं हूती
होर्मुज के अलावा लाल सागर में स्थित बाब अल-मंदेब को लेकर भी अनिश्चितता जताई जा रही है। आशंका है कि ईरान के समर्थक हूती विद्रोही भी यहां के समुद्र से गुजरने वाली इंटरनेट केबलों को काट सकते हैं। होर्मुज और बाब अल-मंदेब में बिछीं ये फाइबर-ऑप्टिक केबलें पूरी दुनिया के इंटरनेट को चलाने वाले लगभग सभी डेटा को ले जाती हैं, जिनके कटने से वीडियो कॉल और ईमेल से लेकर AI सेवाएं तक ठप हो सकती हैं।
केबलें
लाल सागर और होर्मुज में करीब 20 इंटरनेट केबलें
लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में कम से कम 20 समुद्री केबलें हैं। दूरसंचार, डेटा सेंटर और डिजिटल अवसंरचना उद्योग वेबसाइट कैपेसिटी ग्लोबल के अनुसार, लाल सागर से होकर 17 केबलें गुजरती हैं। ये यूरोप, एशिया और अफ्रीका को आपस में जोड़ने वाले इंटरनेट ट्रैफिक का सबसे बड़ा हिस्सा संभालती हैं। होर्मुज में भी अहम केबलें बिछी हैं, जो खाड़ी देशों को एशिया और अफ्रीका जैसे अहम महाद्वीपों के बाजारों और उपयोगकर्ताओं से जोड़ती हैं।
भारत
भारत पर भी पड़ सकता है असर
टेलीजियोग्राफी के अनुसार, फारस की खाड़ी में सक्रिय केबल AAE-1, FALCON, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल केबल सिस्टम और टाटा-TGN गल्फ हैं। ये लाइनें सीधे भारत के विदेशी डेटा कनेक्शनों को सपोर्ट करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का लगभग एक-तिहाई पश्चिमी डेटा ट्रैफिक उन नेटवर्कों से होकर गुजरता है, जो होर्मुज या उसके करीब से जाते हैं। SEA-ME-WE 4, I-ME-WE और FALCON जैसे सिस्टम इस क्षेत्र के जरिए भारत को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ते हैं।
चुनौती
वर्तमान हालात में नहीं हो सकती केबलों की मरम्मत
हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों नेAI को लेकर लाखों डॉलर का निवेश किया है। इन देशों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने अपने डेटा सेंटर बनाए हैं। अगर ये केबल काट दी जाती हैं, तो युद्ध को देखते हुए इनकी मरम्मत असंभव है। ब्लूमबर्ग से बात करते हुए टेलीजियोग्राफी के एलन मौल्डिन ने कहा, "केबल शिप सक्रिय युद्ध क्षेत्र में काम नहीं करेंगे, यह बहुत जोखिम भरा है।"