बांग्लादेश चुनाव: जमात-ए-इस्लामी ने जीत के लिए बनाई ये रणनीति, क्यों बढ़ी भारत की चिंता?
क्या है खबर?
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। अतंरिम सरकार के शासन में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। अब चुनाव जीतने के लिए जमात की रणनीति सामने आई है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जमात की रणनीति राष्ट्रीय विस्तार पर आधारित नहीं, बल्कि प्रभाव वाली सीटों को मजबूत करने और ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर है। जमात ने सभी 300 संसदीय सीटों पर अपनी संभावनाओं का पुनर्मूल्यांकन किया है।
रणनीति
162 सीटों के लिए बनाई खास रणनीति
न्यूज18 ने बताया कि जमात के रणनीतिकारों ने 1991 और 1996 के चुनाव और कई आंतरिक सर्वेक्षणों का विश्लेषण कर रणनीति बनाई है। अक्टूबर, 2024 तक पार्टी ने 162 ऐसी सीटों की पहचान कर ली थी, जहां जीत के ज्यादा आसार हैं। इसके बाद पार्टी ने अपनी संगठनात्मक शक्ति, कार्यकर्ताओं की तैनाती और संसाधनों को बाकी सीटों से हटाकर इन प्राथमिकता वाली सीटों पर केंद्रित कर दिया। इन सीटों में राजधानी ढाका की लगभग 20 सीटें भी शामिल हैं।
रिपोर्ट
मतदाताओं को साधने के लिए ये है रणनीति
पार्टी ने डाक मतपत्रों के जरिए मतदान कराने के लिए व्यापक योजना बनाई है। इसके जरिए लगभग 15 लाख प्रवासी समर्थ और घरेलू मतदाताओं को साधा जा रहा है। शहरों में जमात की महिला शाखा और इस्लामी छात्र संघ घर-घर जाकर मतदाताओं से अपील कर रहे हैं। इन्हें मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक लाने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने यही रणनीति कई विश्वविद्यालय चुनावों में भी अपनाई थी और सफलता प्राप्त की थी।
पैसे
भारी-भरकम पैसे खर्च कर रही पार्टी
रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने 162 से 188 प्राथमिकता वाली सीटों के लिए करोड़ो रुपये का फंड जारी किया है। इसके अलावा वो नेशनल सिटिजन पार्टी सहित अपने सहयोगियों का खर्च भी उठा रही है। कार्यकर्ताओं को गरीब मतदाताओं के पहचान पत्र, मोबाइल नंबर और खातों से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने का काम भी सौंपा गया है, ताकि मतदान के दिन से पहले इनके खातों में पैसे भेजे जा सकें।
भारत
भारत के लिए क्या है चिंता की बात?
भारतीय खुफिया एजेंसियां जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव पर नजर रख रही हैं। अगर जमात सरकार में आती है, तो इसे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है खासतौर से पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों के लिए। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जमात की जीत केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं होगी, बल्कि भारत की सीमा सुरक्षा, आंतरिक स्थिरता और कट्टरपंथ विरोधी प्रयासों के लिए दीर्घकालिक असर वाला घटनाक्रम होगा।