मध्य-पूर्व और यूक्रेन संकट की वजह से ईंधन की कीमतें बेकाबू, यूरोप ने उठाए बड़े कदम
मध्य-पूर्व और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष की वजह से पूरे यूरोप में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इस बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने के लिए यूरोपीय सरकारें कई कदम उठा रही हैं।
सरकार ने लोगों को सब्सिडी देने, टैक्स में छूट देने की बात कही है और वह नई नीतियां बना रही हैं। मकसद ये है कि ऊर्जा की कीमतें बेकाबू न हों।
OECD की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर के देशों ने इस स्थिति में दखल दिया है। उनका लक्ष्य है कि ऊर्जा आपूर्ति में कमी और ईंधन की बढ़ती कीमतों का अर्थव्यवस्था पर ज्यादा बुरा असर न पड़े।
यूरोपीय संघ के देश अपना रहे हैं ऊर्जा के लिए अलग-अलग उपाय
यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देश इस संकट से निपटने के लिए अपनी-अपनी रणनीति अपना रहे हैं। जैसे, जर्मनी ने फिर से ईंधन पर टैक्स में कटौती की है और वह कीमतों की एक ऊपरी सीमा (प्राइस कैप) तय करने पर भी विचार कर रहा है। फ्रांस ने लोगों को ईंधन की ऊंची कीमतों से राहत देने के लिए 45 करोड़ यूरो का राहत पैकेज जारी किया है।
इटली ने कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों को बंद करने की अपनी तय योजना को टाल दिया है। साथ ही, तेल और प्राकृतिक गैस के प्रोजेक्ट्स के लिए कागजी कार्यवाही (पेपरवर्क) में भी कमी की है।
पूरे यूरोपीय संघ ने सदस्य देशों को खेती और परिवहन जैसे जरूरी सेक्टरों को ज़्यादा मदद देने की अनुमति दी है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ अमेरिका के साथ अपने संबंधों पर भी पैनी नजर बनाए हुए है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका से होने वाले डीजल के निर्यात में कोई भी बदलाव यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति के लिए और भी बड़ी चुनौती बन सकता है।