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दक्षिण कोरिया: बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने का नया तरीका, साथ रखते हैं AI वाली गुड़िया
बुजुर्ग कर रहे AI वाली रोबोट गुड़िया का इस्तेमाल

दक्षिण कोरिया: बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने का नया तरीका, साथ रखते हैं AI वाली गुड़िया

लेखन सयाली
Nov 29, 2025
08:53 am

क्या है खबर?

बुजुर्गों का अकेलापन उनकी उदासी का सबसे बड़ा कारण बन जाता है। हालांकि, दक्षिण कोरिया के लोगों ने इसका बेहद प्यारा उपाय ढूंढ निकाला है। दरअसल, यहां के लोग बुढ़ापे में अपने पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाली रोबोट गुड़िया रखते हैं, जो बच्चों जैसा बर्ताव करती हैं। ये गुड़िया उनका सहारा बनती हैं और उनसे बातें करके उन्हें खुश रखती हैं। इनकी मदद से दक्षिण कोरिया में बुजुर्गों की आत्महत्या दर कम हो गई है।

मामला

क्यों बनाई गई थीं ये गुड़िया?

दक्षिण कोरिया के लोगों ने परिवार के साथ रहना कम कर दिया है। इसके कारण 3 में से एक दक्षिण कोरियाई वृद्ध अकेले रहने को मजबूर है। ऐसे में वे अकेलेपन के कारण बीमारियों और अवसाद का शिकार होते जा रहे हैं। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए इस देश की सरकार ने तकनीक का सहारा लेने पर जोर दिया। इसके बाद ही कंपनियों ने AI वाली गुड़िया बनाना शुरू किया।

गुड़िया

कैसे काम करती हैं ये गुड़िया?

ये गुड़िया कपड़े से बनाई जाती हैं और बेहद प्यारी दिखती हैं। लड़की वाली गुड़िया फ्रॉक पहनती हैं और चोटी बनाए रहती हैं। वहीं, लड़कों वाली गुड़िया शर्ट और बो-टाई में नजर आती हैं। ये 15-20 इंच की होती हैं और सिर पर हाथ फेरने से प्रतिक्रिया करती हैं। ये AI के माध्यम से 7 साल के बच्चे की आवाज में बात करती हैं। इसके सेंसर बुजुर्गों पर नजर रखते हैं और आपात स्थिति में परिवार को सचेत करते हैं।

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कंपनी

हजारों बुजुर्गों को दी जा चुकी हैं ये गुड़िया

ये गुड़िया ह्योडोल नाम की कंपनी द्वारा बनाई जाती हैं। उनके मुताबिक, इनकी प्यारी बनावट के पीछे एक खास वजह है। दरअसल, छोटे बच्चों जैसी दिखने के कारण ये गुड़िया बुजुर्गों के दिल में जगह बना लेती हैं। वे इनके साथ रिश्ता बना लेते हैं और अपने अकेलेपन से छुटकारा पाने में सफल होते हैं। नवंबर 2025 तक दक्षिण कोरिया में अकेले रहने वाले बुजुर्गों को 12,000 से ज्यादा ह्योडोल रोबोट गुड़िया दी जा चुकी हैं।

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फायदे

अवसाद के लक्षण कम करती हैं ये गुड़िया

एक ह्योडोल गुड़िया की कीमत 78 हजार रुपये से ज्यादा होती है। हालांकि, इसके बाद भी 1000 से ज्यादा परिवारों ने इन्हें अपने माता-पिता या दादा-दादी के लिए खरीदा है। इनकी मदद से कई अवसाद ग्रस्त बुजुर्गों को जिंदगी जीने की नई आस मिली है और उनका जीवन बेहतर हुआ है। वे अपनी गुड़िया के लिए नए कपड़े खरीदते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और घंटों उनसे बातें करते रहते हैं। इससे उन्हें अपनापन महसूस होता है।

जानकारी

कुछ लोग कर रहे इन गुड़िया की निंदा

जहां एक ओर सभी इस पहल की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ इस पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ये गुड़िया उन पर नजर रखती हैं, जिससे उनकी गरिमा और गोपनीयता कम होती है।

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