शुभांशु शुक्ला को अंतरिक्ष में साहसी मिशन के लिए अशोक चक्र से किया गया सम्मानित
क्या है खबर?
भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को आज (26 जनवरी) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान आमतौर पर शांतिकालीन बहादुरी के लिए दिया जाता है। अंतरिक्ष मिशन के लिए यह सम्मान मिलना खास माना जा रहा है। इससे भारत की बदलती राष्ट्रीय सेवा सोच और विज्ञान, तकनीक व सुरक्षा के नए स्वरूप को दर्शाता है, जहां अंतरिक्ष भी अब देश सेवा का अहम हिस्सा बन रहा है।
ट्विटर पोस्ट
शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र
77th #RepublicDay🇮🇳 | Indian astronaut IAF Group Captain Shubhanshu Shukla conferred with India's highest peacetime gallantry award, the Ashoka Chakra
— ANI (@ANI) January 26, 2026
(Source: DD) pic.twitter.com/Hhx0YuLKms
सफर
लखनऊ से अंतरिक्ष तक का सफर
शुभांशु लखनऊ में जन्मे हैं और बचपन से ही उड़ान का सपना देखते रहे। वह भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट बने और उन्होंने कई आधुनिक लड़ाकू विमानों को उड़ाया। बाद में वह टेस्ट पायलट बने और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी की। 2019 में उन्हें गगनयान मिशन के लिए चुना गया, जिसके तहत उन्हें भारत और रूस में विशेष प्रशिक्षण मिला, जिससे वह अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार हुए।
मिशन
जोखिम भरे मिशन में साहस
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए एक्सिओम-4 मिशन बेहद जोखिम भरा था। शुभांशु ने इस मिशन में स्पेस-X ड्रैगन यान को पायलट किया और माइक्रोग्रैविटी में कठिन ऑपरेशन संभाले। किसी भी छोटी गलती से बड़ा खतरा हो सकता था। फिर भी उन्होंने धैर्य और साहस दिखाया। इसी बहादुरी और जिम्मेदारी के लिए उन्हें अशोक चक्र दिया गया। वह अंतरिक्ष में यह सम्मान पाने वाले दूसरे भारतीय बने, उनसे पहले राकेश शर्मा को यह सम्मान मिला था।
प्रेरणा
युवाओं के लिए प्रेरणा
इस सम्मान ने युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश दिया है। अब देश सेवा केवल जमीन, समुद्र या आकाश तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष भी भारत की राष्ट्रीय जिम्मेदारी का हिस्सा बन चुका है। शुभांशु अब गगनयान मिशन से जुड़े अहम कार्यों पर काम कर रहे हैं। वह क्रू ट्रेनिंग और सुरक्षा सिस्टम को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं। उनका सफर भारत के भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।