
एलन मस्क की न्यूरालिंक का कमाल, बन्दर ने दिमाग से खेला वीडियो गेम
क्या है खबर?
अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की टीम सैटेलाइट इंटरनेट से लेकर इलेक्ट्रिक कारों तक फ्यूचर टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है।
एलन मस्क का स्टार्टअप न्यूरालिंक ऐसी टेक्नोलॉजी से जुड़ा है, जिसके साथ कंप्यूटर्स को सीधे दिमाग से कंट्रोल किया जा सकेगा।
न्यूरालिंक की ओर से एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें एक बंदर अपने दिमाग से सिग्नल भेजकर वीडियो गेम खेलता दिख रहा है। ऐसा बंदर के सिर में किए गए ट्रांसप्लांट की वजह से संभव हो पाया है।
वीडियो
वीडियो गेम खेलते हुए दिख रहा है बंदर
मस्क ने न्यूरालिंक से जुड़ा एक वीडियो माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर शेयर किया है और इसमें एक बंदर पॉन्ग गेम खेलते हुए दिख रहा है।
यह बंदर न्यूरालिंक टेक्नोलॉजी के साथ अपने दिमाग की मदद से गेमिंग कर रहा है।
दरअसल, न्यूरालिंक एक खास ब्रेन-मशीन पर काम कर रही है, जिसे दिमाग में इंप्लांट किया जा सकेगा।
यह टेक्नोलॉजी इंसानी दिमाग को सीधे कंप्यूटर से जोड़ देगी और दिमाग से संकेत देकर कंप्यूटर चलाया जा सकेगा।
कमाल
यह है बंदर की पूरी कहानी
वीडियो में दिख रहे नौ साल के मकाउ बंदर पेजर के दिमाग में यह वीडियो शूट करने से करीब छह सप्ताह पहले न्यूरालिंक इंप्लांट किया गया था।
इसमें दिखाया गया है कि पेजर को पहले जॉयस्टिक की मदद से ऑन-स्क्रीन गेम खेलना सिखाया गया।
पहले पेजर जॉयस्टिक की मदद से गेम खेलता रहा और न्यूरालिंक इंप्लांट के बाद जॉयस्टिक कंप्यूटर से डिस्कनेक्ट कर दी गई।
यानी कि पेजर अब अपने दिमाग से संकेत देकर गेमिंग कर सकता है।
बयान
दिमाग को सीधे कंप्यूटर से जोड़ने में सफलता
न्यूरालिंक ने आधिकारिक बयान में कहा, "हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि लिंक की क्षमता के साथ पेजर नाम का एक मकाउ बंदर कंप्यूटर स्क्रीन पर दिख रहा कर्सर न्यूरल ऐक्टिविटी के साथ मूव कर सकता है और इसके लिए 1024 फुली-इंप्लांटेड न्यूरल रिकॉर्डिंग और डाटा ट्रांसमिशन डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है।"
मस्क ने भी लिखा है, "एक बंदर ब्रेन चिप की मदद से वीडियो गेम खेल रहा है।"
फायदा
यह होगा न्यूरालिंक टेक्नोलॉजी का फायदा
मस्क ने इससे पहले बताया है कि न्यूरालिंक प्रोडक्ट की मदद से 'पैरालिसिस का शिकार हुआ कोई व्यक्ति अपनी उंगलियों की मदद से फोन इस्तेमाल कर रहे किसी व्यक्ति के मुकाबले अपने दिमाग की मदद से ज्यादा तेजी से स्मार्टफोन इस्तेमाल कर सकेंगे।'
इस टेक्नोलॉजी के अगले वर्जन में ब्रेन सिग्नल्स की मदद से दूसरे डिवाइसेज को कंट्रोल करने जैसे काम किए जा सकेंगे, जिसका फायदा गंभीर बीमारियों से जुड़े लोगों को मिलेगा।