IISc ने तैयार किया 65 भारतीय भाषाओं को समझने वाला ओपन-सोर्स स्पीच रिकॉग्निशन मॉडल
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), आर्टपार्क और गूगल ने मिलकर 'श्रावणी' नाम का एक नया मॉडल लॉन्च किया है। यह एक ओपन-सोर्स स्पीच रिकॉग्निशन मॉडल है, जो 65 भारतीय भाषाओं को समझता है।
इसकी सबसे खास बात यह है कि यह 44 ऐसी लो-रिसोर्स भाषाओं को भी कवर करता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक कोई भी दूसरा ऑटोमैटिक स्पीच रिकॉग्निशन (ASR) सिस्टम इन भाषाओं को आधिकारिक तौर पर सपोर्ट नहीं करता। इससे लोग अपनी मातृभाषा में वॉयस टेक्नोलॉजी का आसानी से इस्तेमाल कर पाएंगे।
31,000 घंटे से अधिक डाटा पर किया तैयार
श्रावणी को पूरे देश के 165 जिलों से जमा किए गए 31,000 घंटे से भी ज्यादा के स्पीच डाटा के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें निशी जैसी कम प्रचलित भाषाओं के भी अलग-अलग लहजे और बोलियों को शामिल किया गया है।
यह मॉडल मुख्य भारतीय भाषाओं में काफी अच्छा प्रदर्शन करता है। इसका औसत वर्ड एरर रेट 28.4 फीसदी है और गारो जैसी कुछ कम बोली जाने वाली भाषाओं में तो यह कमाल कर देता है।
यह MIT लाइसेंस के तहत एक ओपन-सोर्स मॉडल है। डेवलपर्स इसे अपनी जरूरत के हिसाब से ढाल सकते हैं। इससे पूरे देश में वॉयस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल सबके लिए आसान और किफायती बन पाएगा।