डॉ. गीता को स्तन कैंसर की जांच तकनीक विकसित करने की कहां से मिली प्रेरणा?
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से स्वर्ण पदक विजेता डॉ. गीता मंजूनाथ के लिए स्तन कैंसर शुरू में कोई रिसर्च का विषय या स्टार्टअप का मौका नहीं था। यह मामला तब बहुत निजी हो गया, जब कम समय में ही उनके 2 चचेरी बहनों की इस बीमारी से मौत हो गई। एक मामले में मैमोग्राम से कैंसर का पता नहीं चल पाया था। जब तक बीमारी का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इसी से प्रेरित होकर उन्होंने 2016 में निरामाई हेल्थ एनालिटिक्स की स्थापना की, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के लिए कैंसर की शुरुआती और सुलभ स्क्रीनिंग हो सके।
ऐसे की जाती है कैंसर की जांच
निरामाई, थर्मलाइटिक्स नाम की तकनीक इस्तेमाल करता है। यह एक ऐसी तकनीक जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विशेषज्ञ और थर्मल इमेजिंग को एक साथ जोड़कर कैंसर से जुड़े तापमान के पैटर्न को पहचानती है।
इसमें न तो कोई रेडिएशन होता है और न ही किसी तरह का दबाव डालने की जरूरत पड़ती है। यह मशीन पोर्टेबल है, यानि इसे उन दूरदराज के इलाकों तक भी आसानी से ले जाया जा सकता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं।
अब तक पूरे देश में 4 लाख से ज्यादा महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और इनमें से 2,000 से ज्यादा मामलों में कैंसर की पहचान की गई है।