अग्निकुल ने 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन की क्विक स्टार्ट क्षमता का सफलतापूर्वक किया परीक्षण
चेन्नई की स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस ने भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। उसने 2 जून को अपने पूरी तरह से 3-D प्रिंटेड अग्निते रॉकेट इंजन का सफल परीक्षण किया।
करीब 19 सेकेंड तक चले इस क्विक स्टार्ट परीक्षण ने इंजन की दक्षता और उसके सटीक नियंत्रण को बखूबी दर्शाया। किसी घरेलू निजी कंपनी के लिए यह वाकई में एक बड़ी उपलब्धि है।
3-D प्रिंटिंग से इंजन बनाने का समय हुआ कम
अग्निते इंजन को एक ही टुकड़े में बनाया गया है, जो इनकोनेल नामक एक बेहद मजबूत मिश्र धातु से तैयार होता है। यह मिश्र धातु इंजन को अत्यधिक गर्मी और दबाव झेलने में सक्षम बनाता है।
पंपों को चलाने वाली इलेक्ट्रिक मोटर्स की वजह से यह इंजन बहुत जल्दी प्रज्वलित हो जाता है और स्टेज अलग होने के बाद सहजता से समायोजित हो सकता है।
इसका सीधा मतलब है कि रॉकेट अब अंतरिक्ष में ज्यादा पेलोड ले जा सकेंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और IN-SPACe के सहयोग से अग्निकुल 3-D प्रिंटिंग का उपयोग करके सिर्फ एक सप्ताह में इंजन तैयार करता है, जबकि पहले इसमें महीनों लग जाते थे।
इससे न केवल लागत कम होती है, बल्कि लॉन्च की रफ्तार भी बढ़ जाती है। उनका लक्ष्य है कि भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए सैटेलाइट लॉन्च की सेवाएं मांग पर और सबके लिए सुलभ बनाई जा सकें।