AI में भारी निवेश को लेकर न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने दी चेतावनी
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल में प्रोफेसर अस्वथ दामोदरन ने वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रहे भारी निवेश को लेकर चेतावनी दी है। दामोदरन को 'वैल्यूएशन के डीन' नाम से भी जाना जाता है।
उनका कहना है कि इससे 2000-01 के डॉट-कॉम क्रैश से भी बड़े आर्थिक खतरे पैदा हो सकते हैं। उस वक्त सिर्फ हल्के-फुलके सॉफ्टवेयर पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था, लेकिन आज AI के इस उभार में डाटा सेंटर, चिप्स और बिजली पर बहुत बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ रहा है। इसीलिए, दामोदरन इसे इंफ्रास्ट्रक्चर बूम बता रहे हैं।
भारत पर भी हाेगा इसका असर
इन नए इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा हिस्सा कर्ज लेकर तैयार किया जा रहा है। अगर, AI कंपनियां उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं दे पाईं तो भारी डिफॉल्ट और आर्थिक अस्थिरता का जोखिम बढ़ जाएगा, जिसका असर सिर्फ टेक शेयरों तक ही सीमित नहीं रहेगा।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसे बड़े खिलाड़ी इन निवेशों की अगुवाई कर रहे हैं। अकेले वैश्विक डाटा सेंटर के निर्माण पर ही 2028 तक करीब 3,000 अरब डॉलर (करीब 2.8 लाख अरब रुपये) खर्च होने का अनुमान है, ऐसे में दांव बहुत बड़े हैं।
भारत का बढ़ता हुआ AI सेक्टर भी इसका असर महसूस कर सकता है, खासकर अगर, वैश्विक स्तर पर चीजें धीमी पड़ गईं तो स्टार्टअप्स और नई भर्तियों पर इसका खासा असर दिखेगा।
दामोदरन जोर देकर कहते हैं कि एक और बड़े आर्थिक संकट से बचने के लिए टिकाऊ विकास ही सबसे ज्यादा जरूरी है।