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अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स लीबर चीन में बना रहे हैं ब्रेन-कंप्यूटर लैब, बढ़ी वैश्विक चिंता
अमेरिकी वैज्ञानिक चीन में बना रहे हैं ब्रेन-कंप्यूटर लैब

अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स लीबर चीन में बना रहे हैं ब्रेन-कंप्यूटर लैब, बढ़ी वैश्विक चिंता

May 01, 2026
11:01 am

क्या है खबर?

दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाने वाली ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक को लेकर चीन में नई हलचल देखी जा रही है। अमेरिका के वैज्ञानिक चार्ल्स लीबर अब शेनझेन में नई लैब चला रहे हैं। लीबर को पहले चीन से जुड़े मामले में दोषी पाया गया था। यह तकनीक इंसानी दिमाग और मशीन को जोड़ने से जुड़ी है। चीन सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है और तेजी से रिसर्च आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।

उम्मीद

इलाज और तकनीक में बड़े बदलाव की उम्मीद

लीबर इस तकनीक के प्रमुख विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस से पैरालाइज्ड मरीजों को चलने में मदद मिल सकती है और गंभीर बीमारियों के इलाज में नई राह खुल सकती है। इसके अलावा, इस तकनीक के जरिए इंसानी दिमाग के सिग्नल को समझकर मशीनों को कंट्रोल करना भी संभव हो सकता है। हालांकि, इसके सैन्य इस्तेमाल को लेकर भी चिंता बढ़ रही है, क्योंकि इससे सैनिकों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश हो सकती है।

सजा

अमेरिका में सजा के बाद चीन में वापसी

लीबर को साल 2021 में अमेरिकी अदालत ने दोषी ठहराया था। उन पर चीन से जुड़े पेमेंट और एक प्रोग्राम की जानकारी छिपाने का आरोप था। उन्हें जेल और जुर्माना भी भुगतना पड़ा। सजा पूरी करने के बाद अब उन्होंने चीन में नई शुरुआत की है। यहां उन्हें बेहतर रिसर्च सुविधाएं और आधुनिक उपकरण मिल रहे हैं, जिससे वह अपनी तकनीक पर तेजी से काम कर पा रहे हैं और नए प्रयोग कर रहे हैं।

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चिंता

नई लैब से बढ़ी वैश्विक चिंता

लीबर अब चीन के i-BRAIN संस्थान से जुड़े हैं। यह संस्थान बड़े स्तर पर दिमाग से जुड़ी तकनीकों पर काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां बंदरों पर भी प्रयोग किए जा रहे हैं, ताकि इंसानी दिमाग को बेहतर समझा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस तेजी से बढ़ती तकनीकी ताकत से अमेरिका और अन्य देशों की चिंता बढ़ सकती है, खासकर जब इसका उपयोग रक्षा क्षेत्र में भी संभव है।

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