
रास्पबेरी पाई आधारित इस डिवाइस के जरिए दिमाग से कंप्यूटर को किया जा सकता है कंट्रोल
क्या है खबर?
इंसानों में दिमाग से कंप्यूटर को कंट्रोल करने की क्षमता है। इस स्किल में इंसान और महारत हासिल कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी फायदेमंद है, लेकिन कई बार यह जेब पर भारी पड़ती है।
हालांकि, हेरियट-वॉट यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता इल्डर राख्मतुलिन ने अब इसका समाधान खोज लिया है।
उन्होंने एक ऐसा डिवाइस बनाया है, जो कम कीमत वाले सिंगल बोर्ड कंप्यूटर रास्पबेरी पाई को ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) में बदल देता है।
ब्रेन
बड़े पैमाने पर है BCI का उपयोग
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर उपयोग है। शुरुआत में इसका विकास लकवाग्रस्त लोगों को सहायक उपकरणों को कंट्रोल करने से जुड़ा था। हालांकि, समय के साथ इसका उपयोग बढ़ता गया।
इसके अन्य उपयोग में समझने की प्रक्रिया के प्रदर्शन में सुधार के लिए BCI का इस्तेमाल न्यूरोफीडबैक टूल के रूप में किया गया। इसकी खामी यह है कि यह टेक्नोलॉजी महंगी है।
राख्मतुलिन का नया डिवाइस महंगी BCI टेक्नोलॉजी के लिए बड़ा समाधान हो सकती है।
डिवाइस
राख्मतुलिन ने तैयार किया PiEEG डिवाइस
राख्मतुलिन ने रास्पबेरी पाई के लिए विशेष एड-ऑन डेवलप किया है, जिसे PiEEG कहा जाता है। यह एक ओपन-सोर्स रास्पबेरी पाई शील्ड है, जो दिमाग में इलेक्ट्रिक सिग्नल्स को माप सकता है।
यह डिवाइस इलेक्ट्रोड की मदद से दिमाग से इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी (EEG) जैसे संकेतों को रिकॉर्ड कर सकता है।
ये दिल से जुड़े इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी जैसे सिग्नल्स की रिकॉर्डिंग भी कर सकता है। नया डिवाइस कंकाल की मांसपेशियों से भी इलेक्ट्रोमोग्राफी जैसे सिग्नल प्राप्त करता है।
सिग्नल
ऐसे काम करता है नया डिवाइस
रास्पबेरी पाई की मदद से राख्मतुलिन द्वारा तैयार नए डिवाइस का उपयोग त्वचा के संपर्क में इलेक्ट्रोड को PiEEG बोर्ड से जोड़कर किया जा सकता है।
यह दिमाग से एनालॉग सिग्नल लेकर उन्हें डिजिटाइज करता है और रास्पबेरी पाई तक पहुंचाता है।
इसमें नॉइस कम करने के लिए सॉफ्टवेयर में एक बैंडपास फिल्टर लगा है।
इसमें डाटा को पढ़ने, प्रोसेस और डिस्प्ले करने के लिए C, C++ और पाइथन के सूट का उपयोग होता है।
न्यूरोसाइंस
बाजार में नही हैं दिमाग के सिग्नल्स को पढ़ने वाले सस्ते डिवाइस
राख्मतुलिन ने मदरबोर्ड को बताया कि दिमाग के सिग्नल्स को पढ़ने के लिए किफायती डिवाइस की बाजार में अनुपलब्धता ने उन्हें चकित कर दिया।
राख्मतुलिन द्वारा तैयार किया गया पहला उपकरण चिप की कमी के कारण महंगा निकला। इसको सस्ता बनाने के लिए राख्मतुलिन रास्पबेरी पाई और PiEEG तक पहुंचे।
उन्होंने PiEEG के लिए क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया है। उन्होंने दुनिया भर में न्यूरोसाइंस में बढ़ती दिलचस्पी के कारण प्रोजेक्ट शुरू किया।
यूज
नए डिवाइस की कीमत?
राख्मतुलिन के डिवाइस को गेमिंग, रोबोटिक्स, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स, हेल्थ, मेडिटेशन सहित कई मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है। ये रियल-टाइम में बायो-सिग्नल्स को पढ़ने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि यह DIY पॉलीग्राफ प्रयोगों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह डिवाइस रास्पबेरी पाई 3 और 4 मॉडल को सपोर्ट करता है। दोनों की कीमत 8,000 रुपये से कम है। इसके अलावा PiEEG की कीमत लगभग 20,000 रुपये से 30,000 रुपये के बीच है।