तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान के क्या हैं मायने, DMK या AIADMK में से किसकी बढ़ेगी परेशानी?
क्या है खबर?
तमिलनाडु में बीते दिन हुए विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 85 प्रतिशत मतदान हुआ है। ये राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान है। खासतौर पर महिला मतदाताओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया। चुनाव में 85.76 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। पिछली बार जब रिकॉर्ड मतदान हुआ था, तो राज्य में सत्ता बदल गई थी। क्या इस बार भी ऐसा होने वाला है? आइए समझते हैं।
पिछला मतदान प्रतिशत
पिछले चुनावों में कैसी रही मतदाताओं की भागीदारी?
आमतौर पर तमिलनाडु में 70 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होता रहा है। 2006 के विधानसभा चुनावों से लगातार यही ट्रेंड बना हुआ है। पिछले यानी 2021 के चुनावों में 73.63 प्रतिशत, 2016 में 74.81 प्रतिशत, 2011 में 78.29 प्रतिशत, 2006 में 70.82 प्रतिशत, 2001 में 59.07 प्रतिशत, 1996 में 66.95 प्रतिशत, 1991 में 63.84 प्रतिशत और 1989 में 69.69 प्रतिशत मतदान हुआ था। भारी मतदान का सत्ता परिवर्तन से भी संबंध रहा है।
सत्ता परिवर्तन
ज्यादा मतदान होने पर क्या रहे चुनावी परिणाम?
2011 में 78 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब जनता ने बिजली की कमी, महंगाई और 2G घोटाले को लेकर अपने गुस्से को वोटों में बदला था और DMK का सत्ता गंवानी पड़ी। नतीजा ये हुआ कि जयललिता की AIADMK को भारी जीत मिली। 2016 में भी ज्यादा मतदान हुआ, लेकिन सत्ता विरोधी लहर के बावजूद AIADMK शासन बचाने में कामयाब रही। हालांकि, उसे पिछले चुनाव के मुकाबले 67 सीटें कम मिलीं।
2021 चुनाव
2021 के चुनावों में क्या हुआ था?
2021 में कोरोना वायरस महामारी के बावजूद हुए चुनावों में लोगों की भागीदारी काफी प्रभावशाली रही। इसका नतीजा सत्ता परिवर्तन के रूप में सामने आया। DMK ने AIADMK पर महामारी से निपटने में विफल रहने के आरोप लगाए। सत्ता विरोधी लहर और जयललिता केनिधन से भी AIADMK को नुकसान उठाना पड़ा। इसका फायदा DMK को हुआ और उसने एक दशक बाद राज्य की सत्ता में वापसी की। एमके स्टालिन मुख्यमंत्री बनें।
मायने
ज्यादा मतदान के क्या हैं मायने?
पिछले आंकड़े बताते हैं कि राज्य में ज्यादा मतदान का संबंध निर्णायक जनादेश से रहा है। जब-जब ज्यादा मतदान हुआ, किसी एक पार्टी को बड़ी और निर्णायक जीत मिली है। इसकी एक बड़ी वजह महिलाओं की भागीदारी भी है। इस बार भी सभी पार्टियों ने प्रमुखता से महिलाओं को अपने घोषणापत्र में शामिल किया है। पिछले कुछ चुनावों से महिलाएं सत्ता बनाने या गिराने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
विजय की पार्टी
क्या थलापति विजय की पार्टी कर पाएगी कमाल?
तमिलनाडु में इस बार अभिनेता थलापति विजय तीसरे मोर्चे के रूप में DMK-AIADMK को चुनौती दे रहे हैं। उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी है, लेकिन नतीजे ही बता पाएंगे कि ये भीड़ वोटों में बदली या नहीं। ऐतिहासिक तौर पर तमिलनाडु में मतदान 2 ही पार्टियों के इर्दगिर्द होते हैं- DMK और AIADMK। छोटी पार्टियों इनके गठबंधन में शामिल होकर जरूर कुछ कमाल कर पाती हैं, लेकिन अपने दम पर तो नहीं।
बयान
रिकॉर्ड मतदान पर क्या कह रही हैं पार्टियां?
AIADMK ने कहा, "वोटों में बढ़ोतरी कोई नई बात नहीं है। पिछली बार यह 4.64 करोड़ थी, इस बार लगभग 23 लाख ज्यादा है। इससे संकेत मिलता है कि सत्ता-विरोधी भावना ने बड़े पैमाने पर भूमिका निभाई है।" DMK ने कहा, "मतदान में बढ़ोतरी SIR के बाद वोटरों की संख्या कम होने से हुई है। यह सामान्य गणित है। आपने SIR से मतदाताओं की संख्या कम कर दी और अब आप कह रहे हैं कि देखो मतदान कितना हो गया।"