
सावरकर पर राहुल गांधी की टिप्पणी का असर, उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस का अहम निमंत्रण ठुकराया
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठक और रात्रिभोज के निमंत्रण को ठुकरा दिया है।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए उद्धव के इस फैसले की जानकारी दी और वीर सावरकर पर राहुल गांधी के बयान को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने कांग्रेस की बैठक में शामिल न होने का निर्णय लिया है।
बयान
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल, सांसदी जाने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने बयान को लेकर माफी मांगने के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा था, "मेरा इतिहास डरने का नहीं है। मैं गांधी हूं, सावरकर नहीं। गांधी कभी माफी नहीं मांगता।"
राहुल के इसी बयान को लेकर शिवसेना ने आपत्ति जताते हुए उनकी निंदा की है। शिवसेना ने कहा कि सावरकर उनके लिए पूज्यनीय हैं और उनका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नाराजगी
उद्धव ठाकरे ने गठबंधन तोड़ने के दिये थे संकेत
इससे पहले ठाकरे ने सावरकर पर राहुल के बयान को लेकर आपत्ति जताते हुए महाराष्ट्र में कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी गठबंधन के टूटने के संकेत दिये थे। ठाकरे ने कहा था, "सावरकर उनके भगवान हैं और उनका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि यह गठबंधन लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया गया था, लेकिन राहुल ने उनके भगवान का अपमान करना बंद नहीं किया तो यह गठबंधन टूट सकता है।
गठबंधन
2019 में हुआ था गठबंधन
2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने गठबंधन किया और इस गठबंधन को महा विकास अघाड़ी (MVA) नाम दिया गया। 26 नवंबर, 2019 को उद्धव को इस गठबंधन का अध्यक्ष चुना गया।
इसके बाद उद्धव के नेतृत्व में महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनी। हालांकि, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने जून, 2022 में 40 विधायकों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी, जिससे गठबंधन की सरकार गिर गई।
कौन
कौन थे वीर सावरकर?
वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे विवादित शख्सियतों में से एक हैं। सेलुलर जेल से रिहा होने के बाद सावरकर ज्यादा सुर्खियों में नहीं रहे और न ही उन्होंने अंग्रेजों का खुलकर विरोध किया था।
सावरकर को हिंदुत्व की विचारधारा का जनक भी माना जाता है और कांग्रेस लगातार उनका विरोध करती रही है। दूसरी तरफ हिंदुत्व की विचारधारा पर चलने वाली भाजपा के लिए सावरकर वैचारिक गुरू की तरह हैं।
क्यों
शिवसेना सावरकर को इतना क्यों मानती है?
विवादों के बावजूद सावरकर का महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा स्थान है। हिंदुत्व की विचारधारा का जनक होने के कारण सावरकर शिवसेना के लिए काफी अहमियत रखते हैं।
शिवसेना हमेशा से वीर सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर पेश करती रही है और उनके मुद्दे पर कभी भी समझौता नहीं करने की बात कहती रही है। शिवसेना की तरफ से कई बार सावरकर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग भी होती रही है।
कांग्रेस
कांग्रेस ने सभी विपक्षी पार्टियों को दिया है निमंत्रण
राहुल की लोकसभा सदस्यता रद्द किये जाने के बाद कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने में जुटी है।
इसे लेकर सोमवार को संसद में मल्लिकार्जुन खड़गे के चैंबर में विपक्षी पार्टियों के नेताओं की एक बैठक हुई थी, जिसमें सभी पार्टियों ने आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की।
सभी पार्टियों के नेताओं को कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की ओर से अपने आवास पर आज रात बैठक और रात्रिभोज का निमंत्रण भी दिया गया है।