महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को लेकर सरकार के पास क्या-क्या हैं विकल्प?
क्या है खबर?
महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में लाया विधेयक पारित नहीं हो सका है। विधेयक को जरूरी दो तिहाई वोट नहीं मिल सके। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण दिलाने का भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का संकल्प अडिग रहेगा। उन्होंने कहा कि विधेयक भले गिर गया, लेकिन वे हारे नहीं है। इसके बाद सरकार की अगली रणनीति को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं।
चर्चा
मानसून सत्र में दोबारा पेश किया जा सकता है विधेयक- रिपोर्ट
NDTV ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार अगले लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ चर्चा कर सकती है और अगर जरूरत पड़ी तो संसद के मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को दोबारा पेश करने पर भी विचार कर सकती है। सरकार ने 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिरने के बावजूद सरकार ने बाकी 2 विधेयकों को वापस नहीं लिया है।
विधेयक
क्या 2029 के चुनावों में मिलेगा महिलाओं को आरक्षण?
सरकार ने जिन 2 विधेयकों को वापस नहीं लिया है, उन्हें कभी भी पेश कर मतदान कराया जा सकता है। दूसरी ओर, 2023 में पारित हुआ 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' अब कानून बन चुका है। यानी 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है। हालांकि, इस कानून में महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना कराने और उस आधार पर परिसीमन की शर्तें हैं।
विकल्प
सरकार के सामने क्या हैं विकल्प?
एक विकल्प ये है कि सरकार जनगणना और परिसीमन के काम को तेजी से करे। जनगणना अभी चल रही है। अगर इसके फौरन बाद परिसीमन आयोग गठित किया जाए और वो निर्धारित समयसीमा में अपना काम पूरा कर ले तो संभव है कि 2029 के चुनावों में महिलाओं का आरक्षण मिल जाए। दूसरा विकल्प यह है कि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव कर परिसीमन किया जाए, जिसका राजनीतिक विरोध कम होगा।
अन्य विकल्प
मौजूदा सीटों पर आरक्षण लागू करने का भी विकल्प
सरकार के पास एक विकल्प ये भी है कि अनुच्छेद 334A में संशोधन कर आरक्षण के प्रावधान को परिसीमन की शर्त से अलग किया जा सकता है। इससे मौजूदा लोकसभा सीटों पर आरक्षण लागू करना संभव हो जाएगा। फिलहाल, 2026 तक परिसीमन पर रोक लगी हुई है। सरकार फिलहाल इस मुद्दे का इस्तेमाल विपक्ष को महिला विरोधी घोषित करने में कर रही है। माना जा रहा है कि इससे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी फायदा हो सकता है।