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नीतीश के बेटे निशांत की सियासी पारी शुरू, पिता की विरासत बढ़ाने समेत ये हैं चुनौतियां
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार JDU में शामिल हो गए हैं

नीतीश के बेटे निशांत की सियासी पारी शुरू, पिता की विरासत बढ़ाने समेत ये हैं चुनौतियां

लेखन आबिद खान
Mar 08, 2026
05:39 pm

क्या है खबर?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हो गए हैं। नीतीश के राज्यसभा जाने का फैसला लेने के बाद निशांत की राजनीति में एंट्री हुई है। कहा जा रहा है कि निशांत को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। निशांत के ऊपर अपने पिता की करीब 2 दशक की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के साथ खुद को स्थापित करने की भी चुनौती होगी। आइए निशांत के बारे में जानते हैं।

परिचय

कौन हैं निशांत कुमार?

निशांत का जन्म 20 जुलाई, 1975 को हुआ था। वे नीतीश के इकलौते बेटे हैं। उन्होंने स्कूली शिक्षा पटना और मसूरी से पूरी की फिर रांची से साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। निशांत ने अभी तक शादी नहीं की है। मुख्यमंत्री का बेटा होने के बावजूद वे लाइमलाइट से दूर रहते हैं। वे सार्वजनिक मंचों पर बहुत कम ही नजर आते हैं। आज यानी 8 मार्च को ही उनकी सक्रिय राजनीति में एंट्री हुई है।

बयान

निशांत बोले- मुझे पिता पर गर्व

JDU में शामिल होने के बाद निशांत ने कहा, "मैं सक्रिय सदस्य के रूप में पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करूंगा। पिताजी ने जो 20 साल में काम किया है, उसे जन-जन तक पहुंचाने का काम करूंगा। मुझे अपने पिता पर गर्व है।" उन्होंने कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए अपने पिता के राज्यसभा जाने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि मैं इस उनके इस निर्णय को स्वीकार करता हूं।

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नेतृत्व

क्या JDU का नेतृत्व कर पाएंगे निशांत?

नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले का पार्टी कार्यकर्ता भारी विरोध कर रहे हैं। नीतीश कुमार के पूर्व सहयोगी प्रेम कुमार मणि ने BBC से कहा, "JDU में नीतीश के बाद कोई दूसरा नेतृत्व नहीं है। राजनीतिक विचारधारा का अभाव पहले ही हो गया था और जो मूल्य बचे थे पार्टी में, वो सब नीतीश के अपने ही थे। अब जब नीतीश नेतृत्व नहीं करेंगे, तो मैं नहीं समझता हूं कि JDU बहुत दिनों तक टिक पाएगी।"

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विशेषज्ञ

कुछ जानकारों का मानना- निशांत सबसे बेहतर विकल्प

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक संतोष सिंह ने BBC से कहा, "JDU के लिए साल 2030 तक कोई खतरा नहीं है। उसके बाद भी पार्टी अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकती है, यहां तक कि अच्छा मुकाबला कर सकती है, अगर पार्टी में निशांत की एंट्री हो जाए। पार्टी को भी लगता है कि एक व्यक्ति जो JDU को बचा सकता है और 2030 के चुनाव तक पार्टी को ले जा सकता है, वह निशांत ही है।"

चुनौतियां

निशांत में राजनीतिक अनुभव की कमी को लेकर चिंताएं

नीतीश के करीबी रहे शिवानंद तिवारी के मुताबिक, अगर पार्टी की बागडोर निशांत के हाथों में ही देनी थी, तो यह प्रक्रिया पहले शुरू होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "निशांत को पहले ही मैदान में उतार देना चाहिए था, ताकि वह पूरे बिहार में घूमते, कार्यकर्ताओं से मिलते और राजनीति की बारीकियों को समझते। लेकिन सिर्फ इसलिए कि वह बेटे हैं और अचानक उन्हें नेतृत्व दे दिया जाए, यह ठीक नहीं है।"

परिवारवाद

नीतीश करते रहे हैं परिवारवाद का विरोध

नीतीश अक्सर वंशवादी राजनीति की आलोचना करते रहे हैं और इसे लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं। अब निशांत की राजनीति में एंट्री को इस स्टैंड के उलट माना जा रहा है। हालांकि, बिहार में ये कोई नई बात नहीं है। लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे राजनीति में सक्रिय हैं। रामविलास पासवान के बेटे चिराग केंद्र में मंत्री हैं।

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