ईरान में नियुक्ति के बाद लगे 'मोजतबा मुर्दाबाद' के नारे, सामने आया वीडियो
क्या है खबर?
ईरान में सर्वोच्च नेता की नियुक्ति का विरोध शुरू हो गया है। विशेषज्ञों की सभा द्वारा अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नामित किया गया है। इसको लेकर तेहरान के एकबतन इलाके के लोगों ने अपना असंतोष व्यक्त किया है। लंदन स्थित ईरान इंटरनेशनल द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक अपुष्ट वीडियो में महिलाएं अपनी खिड़कियों से 'मोजतबा मुर्दाबाद' के नारे लगाती दिखाई दे रही हैं।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें वीडियो
People chanted “Death to Mojtaba” from their windows in Tehran’s Ekbatan neighborhood early Monday shortly before Iran's Assembly of Experts announced Mojtaba Khamenei as the country’s new supreme leader, according to a video shared on social media. pic.twitter.com/nEiM7x7AbM
— Iran International English (@IranIntl_En) March 8, 2026
नेता
मोजतबा 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद तीसरे नेता
56 वर्षीय मोजतबा 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के तीसरे सर्वोच्च नेता नामित हुए हैं। उन्होंने अपने पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई का स्थान लिया है, जिनकी 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हमलों में मौत हो गई थी। नए नेता की नियुक्ति उनके पिता की हत्या के बाद ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े तनाव के बीच हुई है। ऐसे में उनके विरोध ने ध्यान आकर्षित किया है।
धमकी
अमेरिका ने दी नए सर्वोच्च नेता के खिलाफ कार्रवाई की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में अमेरिका की भी राय होनी चाहिए। उन्होंने ABC न्यूज से कहा, "अगर उन्हें हमारी मंजूरी नहीं मिलती है, तो वे ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।" हालांकि, मोजतबा की नियुक्ति पर ट्रंप की शुरुआती प्रतिक्रिया अस्पष्ट थी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "देखते हैं क्या होता है।" रविवार को इजरायल ने भी नए सर्वोच्च नेता के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी थी।
संकट
अयातुल्ला की हत्या के बाद मध्य-पूर्व में फैला तनाव
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद मध्य पूर्व में गहरा संकट पैदा हो गया है, जिसमें 86 वर्षीय आयतुल्ला खामेनेई और अन्य शीर्ष ईरानी नेता मारे गए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। इस संघर्ष में ईरान में 1,350 से अधिक और इजरायल में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई। इसी तरह 7 अमेरिकी सैनिक भी शहीद हुए हैं।