
दिल्ली आकर सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात करेंगी ममता बनर्जी
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस महीने के अंत में दिल्ली आकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात करेंगी।
वे 25 जुलाई को दिल्ली आएंगी और लगभग तीन-चार दिन शहर में बिताएंगी। इसी दौरान वे सोनिया समेत तमाम नेताओं से मिल सकती हैं।
ये दौरा उस समय होगा जब संसद का मानसून सत्र चल रहा होगा। कांग्रेस इस सत्र में सरकार को कोरोना वायरस महामारी समेत तमाम मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रही है।
अन्य नेता
शरद पवार, अखिलेश और केजरीवाल से भी मिलेंगी ममता
NDTV के सूत्रों के अनुसार, चार दिन के अपने इस दौरे में ममता बनर्जी सोनिया गांधी के साथ-साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिलेंगी।
इन मुलाकातों का मुद्दा क्या रहेगा, इसके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है, हालांकि माना जा रहा है कि इनका संबंध विपक्ष को एकजुट करने से हो सकता है।
बयान
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी मिल सकती हैं ममता
अपने दौरे पर बयान देते हुए ममता ने कहा, 'मैं चुनावों के बाद से दिल्ली नहीं गई हूं... मैं संसद सत्र के दौरान दिल्ली जाऊंगा और दोस्तों से मिलूंगी। अगर समय दिया जाता है तो मैं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी मिलूंगी।"
अटकलें
प्रशांत किशोर की बैठकों के बाद गर्म हैं अटकलों का बाजार
ममता का ये दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब पिछले कुछ समय से विपक्ष की एकजुटता को लेकर अटकलें चल रही हैं।
ये अटकलें पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की शरद पवार के साथ दो हफ्तों में दो मुलाकातों के साथ शुरू हुईं।
इसके बाद उन्होंने बुधवार को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ बैठक भी की थी।
कहा जा रहा है कि इन सभी बैठकों का संबंध 2024 लोकसभा चुनाव से है।
रणनीति
ये बताई जा रही प्रशांत किशोर की रणनीति
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रशांत किशोर अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में शरद पवार के लिए लामबंदी कर रहे हैं और उनका मानना है कि अगर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक विपक्षी खेमे का साथ दे दें तो सरकार के प्रत्याशी को हराकर पवार को राष्ट्रपति बनाया जा सकता है।
इसके पीछे सोच है कि इस जीत से 2024 लोकसभा चुनाव में भी फायदा मिलेगा और ये एक तरह से विपक्षी एकजुटता का ट्रायल होगा।
अटकलें
क्या करने की कोशिश कर रहे हैं प्रशांत किशोर?
खबर ये भी है कि प्रशांत भाजपा को हराने के लिए विपक्ष का एक अनौपचारिक गठबंधन तैयार करना चाहते हैं और खुद इसमें सूत्रधार की भूमिका निभा रहे हैं।
तीसरे मोर्चे की संभावना से वे पहले ही इनकार कर चुके हैं और उन्हें कांग्रेस के बिना कोई भी मजबूत विपक्षी गठबंधन बनते हुए नहीं दिख रहा।
प्रशांत ममता के साथ काम कर चुके हैं, ऐसे में संभव है कि ममता के इस दिल्ली दौरा का संबंध उनकी रणनीति से हो।