राष्ट्रीय चेहरे, ममता के करीबी और युवा नेतृत्व; TMC से इन दिग्गजों का हुआ मोहभंग
क्या है खबर?
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 19 लोकसभा सांसद बगावत करने की तैयारी में हैं। दावा किया जा रहा है कि ये अलग गुट बना चुके हैं। इन बागी सांसदों की एक सूची भी सामने आई है, जिसमें कई बड़े नाम हैं। ममता के लिए ये चिंता की बात इसलिए हैं, क्योंकि सूची में अनुभवी सांसदों से लेकर युवा नेताओं के नाम शामिल हैं। आइए जानते हैं कौनसे बड़े नेता TMC में मुंह मोड़ रहे हैं।
सुखेंदु शेखर रे
ममता के करीबी सुखेंदु शेखर रे ने छोड़ी पार्टी
8 जून को सांसद सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और TMC भी छोड़ दी। वे सालों से TMC से जुड़े थे और उन्हें पार्टी के सबसे मुखर संसदीय वक्ताओं और नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था। सालों तक उन्होंने TMC को कई संकटों और विवादों से निकाला। रे जैसे वरिष्ठ और भरोसेमंद नेता के जाने के बाद कई अन्य नेताओं ने भी TMC छोड़ दी।
सयानी घोष
TMC का युवा चेहरा सयानी घोष का भी मोहभंग
मनोरंजन जगत से राजनीति में आईं सयानी घोष ने तेजी से तरक्की की और TMC युवा कांग्रेस का चेहरा बन गईं। सयानी की गिनती उन युवा नेताओं में होती थीं, जिन्हें TMC का भविष्य तय करना था। उनकी तरक्की को अभिषेक बनर्जी के इर्द-गिर्द एक युवा नेतृत्व संरचना को पेश करने के प्रयास के रूप में देखा जाता था। उनकी बगावत ने ये संदेश भी दिया कि विद्रोह केवल उम्रदराज नेताओं तक सीमित नहीं है।
यूसुफ पठान
अधीर रंजन को हराकर चर्चा में आए यूसुफ पठान भी हुए बागी
खेल जगत से निकले यूसुफ पठान ने अपनी लोकप्रियता राजनीति में भुनाई। 2024 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर से उनकी जीत की पूरे देश में चर्चा रही। कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर पठान ने TMC की उस क्षमता को प्रदर्शित किया कि वह लोकप्रियता और सामाजिक गठबंधनों का उपयोग कर राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। TMC के लिए यूसुफ बंगाल के पारंपरिक राजनीतिक वर्ग से परे राष्ट्रीय छवि गढ़ने के प्रयासों का अहम हिस्सा थे।
काकोली घोष दस्तीदार
TMC संगठन की शिल्पकार काकोली घोष ने भी छोड़ा साथ
काकोली घोष दस्तीदार TMC की संगठनात्मक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। चिकित्सक और बारासात से कई बार सांसद रह चुकीं दस्तीदार पार्टी की सबसे अनुभवी सांसदों में से हैं। उनका राजनीतिक करियर उत्तर 24 परगना में पार्टी संगठन के साथ जुड़ाव से बना, जो TMC के सबसे गढ़ में से एक है। दस्तीदार जिला स्तरीय संगठन में गहराई से जुड़े हुए हैं, जिन्होंने वर्षों से TMC की चुनावी मशीनरी को बनाए रखा है।
शत्रुघ्न सिन्हा
TMC के राष्ट्रीय चेहरे शत्रुघ्न सिन्हा पर भी संशय
भाजपा के पूर्व नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और जानी-मानी हस्तियों में से एक शत्रुघ्न सिन्हा को ममता द्वारा खुद को राष्ट्रीय विपक्षी नेता के रूप में स्थापित करने के प्रयासों के तहत TMC में लाया गया था। बंगाल के बाहर सिन्हा से अधिक प्रतीकात्मक महत्व किसी और का नहीं है। हालांकि, आज शत्रुघ्न ने कहा कि उनके मुश्किल समय में ममता साथ खड़ी थीं, इसलिए आज ममता के मुश्किल समय में वे उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते।