TMC में टूट से NDA को कितना फायदा, क्या सरकार पारित करवा पाएगी परिसीमन विधेयक?
क्या है खबर?
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) टूट की कगार पर खड़ी है। इसके 19 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर अलग गुट होने का दावा किया है। अगर ये बागी होते हैं, तो TMC के पास केवल 9 ही लोकसभा सांसद बचेंगे। वहीं, 3 राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे चुके हैं। TMC में इस तोड़फोड़ का फायदा भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को होता दिख रहा है। आइए गणित समझते हैं।
NDA
लोकसभा में 300 पार होगी NDA सदस्यों की संख्या
फिलहाल 543 सदस्यों वाली लोकसभा में NDA के 293 सांसद हैं। अगर TMC के 19 बागी सांसद NDA का समर्थन करते हैं, तो NDA लोकसभा में 300 का आंकड़ा पार कर लेगा। तब ये संख्या 312 के आसपास पहुंच जाएगी। ये पहली बार होगा, जब लोकसभा में NDA के पास 300 से ज्यादा सदस्यों का समर्थन होगा। 2022 में शिवसेना और 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुई टूट के बाद संसद में यह सबसे बड़ा बदलाव होगा।
लोकसभा
लोकसभा में NDA के पास होगा दो-तिहाई बहुमत?
फिलहाल लोकसभा की 3 सीटें खाली हैं। इससे सदन की प्रभावी संख्या 543 से घटकर 540 हो गई है। इस हिसाब से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है। अप्रैल में परिसीमन विधेयक के पक्ष में 298 वोट मिले थे। अब TMC के 19 सांसद मिला लें तो ये आंकड़ा 317 हो जाता है। अगर DMK के 22 सांसद भी समर्थन करे तो आंकड़ा 335 पर पहुंच जाएगा। तब सरकार दो-तिहाई बहुमत से केवल 25 वोट दूर रहेगी।
राज्यसभा
राज्यसभा में कैसे बदलेगा गणित?
आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 पूर्व राज्यसभा सांसदों के शामिल होने के बाद भाजपा के पास राज्यसभा में 113 और NDA के 148 सदस्य हो गए हैं। TMC के 3 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है। इन सीटों पर उपचुनाव में NDA समर्थित उम्मीदवार जीतते हैं तो सदस्यों की संख्या 151 हो जाएगी। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 163 है। 18 जून को 24 सीटों पर चुनाव है। इसके बाद समीकरण और बदल जाएंगे।
विधेयक
क्या सरकार पारित करवा पाएगी परिसीमन विधेयक?
चूंकि परिसीमन से जुड़ा विधेयक संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी है। TMC और DMK के सांसदों के समर्थन के बाद सरकार दो-तिहाई बहुमत से केवल 25 वोट दूर है। ऐसे में सरकार के लिए विधेयक पारित करवाना बड़ी चुनौती नहीं होगी। सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य भी मायने रखेंगे। कुछ सांसदों की क्रॉस वोटिंग ही विधेयक पारित करवाने के लिए काफी होगी।