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अजित पवार: चाचा से राजनीति सीखकर महाराष्ट्र के 'दादा' बनने की कहानी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया है

अजित पवार: चाचा से राजनीति सीखकर महाराष्ट्र के 'दादा' बनने की कहानी

लेखन आबिद खान
Jan 28, 2026
11:02 am

क्या है खबर?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया है। बारामती जाते वक्त उनका विमान हादसे का शिकार हो गया, जिसमें सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई। वे बीते करीब 4 दशक से महाराष्ट्र की राजनीति का अहम चेहरा बने रहे। फिलहाल वे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होने के साथ कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आइए बगावत से लेकर उपमुख्यमंत्री तक अजित का सियासी सफर जानते हैं।

शुरुआती जीवन

पिता के जल्द निधन के बाद छोड़ी पढ़ाई

अजित का जन्म 22 जुलाई, 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव में हुआ था। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे। उनके पिता वी शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। उन्होंने गांव के ही एक स्कूल से अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी की। हालांकि, पिता के जल्द निधन के बाद अजित आगे की पढ़ाई नहीं कर सके।

राजनीति

कैसे रखा राजनीति में कदम?

अजित के चाचा शरद महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से ही स्थापित कांग्रेसी नेता था। पिता के निधन के बाद अजित ने 1982 में पहली बार राजनीति में कदम रखा और एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के सदस्य चुने गए। इस भूमिका ने ग्रामीण आर्थिक प्रणालियों की उनकी समझ को विकसित किया। 1991 में वे पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और लगातार 16 साल तक इस पद पर रहे।

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सांसद

1991 में पहली बार बने सांसद

अजित पहली बार 1991 में संसदीय राजनीति में उतरे और बारामती से सांसद बने। हालांकि, चाचा शरद के लिए उन्होंने सीट छोड़ दी। इसी साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वे बारामती से जीते और 1992 तक कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने। इसके बाद 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार बारामती निर्वाचन क्षेत्र से जीतते रहे। इस दौरान उन्होंने जल आपूर्ति, बिजली, योजना, सिंचाई, बागवानी, ग्रामीण विकास, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

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उपमुख्यमंत्री

13 साल में 6 बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित

अजित पहली बार 2010 में उपमुख्मंत्री बने। इसके बाद 2012 से 2014 तक ये पद दोबारा उनके पास आया। 2019 में वे 2 अलग-अलग मुख्यमंत्री के अधीन उपमुख्यमंत्री बने। 23 नवंबर को उन्होंने देवेंद्र फडनवीस के साथ उपमुख्यमंत्री की शपथ ली, लेकिन सरकार बहुमत साबित नहीं कर सकी। इसके बाद उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में वे फिर उपमुख्यमंत्री बनाए गए। बीते 13 साल में वे 6 बार उपमुख्यमंत्री पद पर रहे।

बगावत

जब चाचा के खिलाफ की बगावत

अजित ने चाचा शरद की उंगली पकड़कर राजनीति सीखी थी, लेकिन 2022 में चाचा के खिलाफ बगावत कर दी। कथित तौर पर शरद द्वारा बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाने से ये मतभेद हुए। कई विधायकों को लेकर अजित महायुति में शामिल हो गए। इससे NCP 2 धड़ों में बंट गई और बाद में अजित ने पूरी NCP पर कब्जा जमा लिया। 2019 में भी अजित ने बगावत की थी, लेकिन तब वे दोबारा NCP में लौट आए थे।

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