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ईद-उल-फितर 2025: किस तारीख को मनाया जाएगा यह त्योहार? जानिए इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

ईद-उल-फितर 2025: किस तारीख को मनाया जाएगा यह त्योहार? जानिए इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

लेखन सयाली
Mar 23, 2025
08:20 pm

क्या है खबर?

रमजान का पाक महीना खत्म होने वाला है, जिसके बाद मुस्लिम धर्म का सबसे बड़ा त्योहार मनाया जाएगा। आखरी रोजे के बाद दुनिया भर के लाखों मुसलमान ईद-उल-फितर के आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं और चांद निकलने की राह तकते हैं। इस पर्व को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। आइए आज हम आपको इस त्योहार की सही तारीख और इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताते हैं।

तिथि

कब मनाई जाएगी ईद?

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान के अगले महीने यानी शव्वाल के पहले दिन ईद मनाई जाती है। रमजान का आगमन 2 मार्च से हुआ था, जिसकी समाप्ति शव्वाल का चांद देखकर ही होगी। रोजे 30 दिन तक चलते हैं, इसीलिए ईद का जश्न 1 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। हालांकि, अगर चांद 30 मार्च की रात को नजर आ जाता है तो 31 मार्च के दिन ही ईद मनाई जाएगी।

इतिहास

किसने पहली बार मनाई थी मीठी ईद?

इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, पाक किताब कुरान पहली बार रमजान के महीने के दौरान पैगंबर मुहम्मद के सामने आई थी। उन्होंने मक्का छोड़ने के बाद मदीना में ईद-उल-फितर मनाने की शुरुआत की थी। सबसे पहले ईद-उल-फितर का जश्न 624 ई. में मनाया गया था, जो इस्लामी इतिहास में पहले रमजान के अंत का प्रतीक थी। इस त्योहार ने 2 अन्य त्योहारों की जगह ली, जो इस्लाम के आगमन से पहले मदीना में मनाए जाते थे।

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महत्त्व

क्या है इस पाक त्योहार का महत्त्व?

इस्लाम में ईद-उल-फितर का खास महत्त्व होता है। माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी। इसकी खुशी में उन्होंने सभी लोगों का मुंह मीठा कराया था। तभी से यह दिन मीठी ईद के नाम से मशहूर हो गया था। इस दिन सभी मुस्लिम घरों में मीठी सेवइयां बनती हैं और दोस्त व रिश्तेदार एक दूसरे को गले मिलकर बधाई देते हैं। यह पर्व अपने साथ खुशियां और बरकत लेकर आता है।

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अन्य तथ्य

ईद से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

ईद शब्द अरबी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है त्योहार। वहीं, ईद-उल-फितर का अर्थ होता है 'उपवास तोड़ने का त्योहार।' ईद का त्योहार मुसलमान लोगों को अल्लाह के करीब ले जाता है। यह वह समय होता है, जब लोग उन्हें दी गई ताकत और अवसरों के लिए अल्लाह का धन्यवाद कहते हैं। इस दिन सभी लोग बैर भुलाकर गले मिलते हैं, एक दूसरे को तोहफे और ईदी देते हैं और तरह-तरह के पकवानों का लुत्फ उठाते हैं।

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