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क्या शक्कर का सेवन करने से बच्चे हो जाते हैं हाइपरएक्टिविटी का शिकार? जानिए सच्चाई
शक्कर से बच्चों में हाइपरएक्टिविटी का भ्रम

क्या शक्कर का सेवन करने से बच्चे हो जाते हैं हाइपरएक्टिविटी का शिकार? जानिए सच्चाई

लेखन सयाली
Mar 01, 2026
11:25 am

क्या है खबर?

बच्चों की ऊर्जा का स्तर और व्यवहार माता-पिता के लिए हमेशा चिंता का विषय बना रहता है। इससे जुडी एक आम धारणा है कि शक्कर का सेवन करने से बच्चों में हाइपरएक्टिविटी बढ़ जाती है। क्या सच में ऐसा होता है या यह सिर्फ एक भ्रम है? इस लेख में हम इसी मिथक की सच्चाई जानेंगे और समझेंगे कि शक्कर का सेवन बच्चों के व्यवहार को कैसे प्रभावित कर सकता है।

#1

शक्कर और हाइपरएक्टिविटी का संबंध

शक्कर का सेवन करने से बच्चों में हाइपरएक्टिविटी होने की धारणा काफी पुरानी है। कई माता-पिता मानते हैं कि जब बच्चे मीठी चीजें खाते हैं तो वे ज्यादा उग्र और सक्रिय हो जाते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक शोध इस बात का समर्थन नहीं करते। कई अध्ययनों में पाया गया है कि शक्कर का सेवन सीधे तौर पर बच्चों के व्यवहार को प्रभावित नहीं करता। हाइपरएक्टिविटी के अन्य कारण हो सकते हैं, जैसे नींद की कमी या तनाव

#2

आहार का संतुलन बनाए रखना जरूरी

बच्चों के खाने में संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। अगर बच्चे सीमित मात्रा में शक्कर वाली चीजें खाते हैं तो इसका उनके व्यवहार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। बेहतर होगा कि माता-पिता बच्चों को सेहतमंद खाना दें, जिसमें फल, सब्जियां और प्रोटीन शामिल हों। इसके अलावा पानी पीने की आदत भी डालें, ताकि बच्चे तरोताजा रहें और उनकी ऊर्जा स्थिर बनी रहे। इस तरह बच्चे न केवल सेहतमंद रहेंगे, बल्कि उनका व्यवहार भी संतुलित रहेगा।

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#3

अन्य कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

हाइपरएक्टिविटी केवल शक्कर के कारण नहीं होती, बल्कि इसमें कई अन्य कारण भी शामिल होते हैं। जैसे कि नींद की कमी, मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी और पारिवारिक समस्याएं। इन सभी कारणों का बच्चों के व्यवहार पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए, सिर्फ शक्कर को दोष देना गलत होगा। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों की जीवनशैली पर ध्यान दें और उन्हें सेहतमंद आदतें सिखाएं, ताकि उनका व्यवहार संतुलित रहे।

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#4

मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर बच्चे किसी प्रकार की तनाव या चिंता का सामना कर रहे हों तो उनका व्यवहार प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति में माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों से खुलकर बात करें और उनकी समस्याओं को समझें। इसके अलावा बच्चों को समय दें और उनके साथ खेलें, ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस करें और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें।

#5

सही जानकारी होना महत्वपूर्ण

माता-पिता के लिए यह जरूरी है कि वे सही जानकारी रखें, ताकि वे अपने बच्चों की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकें। सोशल मीडिया या दोस्तों द्वारा दी गई गलत सलाह पर भरोसा न करें, बल्कि विशेषज्ञों की राय लें और संतुलित आहार पर ध्यान दें। इस प्रकार हम देख सकते हैं कि सिर्फ शक्कर को दोष देना सही नहीं होगा। बच्चों की हाइपरएक्टिविटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनका सही निदान जरूरी है।

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