भारत में चूड़ी बनाने की कला से जुड़ी 5 दिलचस्प बातें, जो इसे बनाती हैं खास
क्या है खबर?
भारत में चूड़ियां बनाने की कला बहुत पुरानी है और यह कई संस्कृतियों और परंपराओं का हिस्सा रही है। चूड़ियां न केवल महिलाओं के श्रृंगार का हिस्सा हैं, बल्कि इनके पीछे कई रोचक कहानियां और रहस्य भी छिपे हुए हैं। इस लेख में हम आपको चूड़ी बनाने की कला से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताएंगे, जो शायद ही आपने पहले कभी सुनी होंगी। इन जानकारियों के जरिए आप इस कला के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
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चूड़ियों का इतिहास
चूड़ियों का इतिहास बहुत पुराना है, जो लगभग 1000 साल पीछे जाता है। पुराने समय में चूड़ियों का इस्तेमाल केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और समृद्धि के प्रतीक के रूप में भी किया जाता था। माना जाता था कि चूड़ियां बुरी आत्माओं से बचाती हैं और खुशी, समृद्धि और सफलता लाती हैं। इसके अलावा शादी के समय दुल्हन को हाथों में चूड़ियां पहनाई जाती थीं, जो उसके सुहाग, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक होती थीं।
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अलग-अलग प्रकार की चूड़ियां
भारत में कई तरह की चूड़ियां बनाई जाती हैं, जिनमें कांच की, लकड़ी की, प्लास्टिक की और सोने-चांदी की चूड़ियां शामिल हैं। कांच की चूड़ियां खासकर उत्तर भारत में बहुत पसंद की जाती हैं, जबकि दक्षिण भारत में लकड़ी और प्लास्टिक की चूड़ियां ज्यादा पहनी जाती हैं। सोने-चांदी की चूड़ियां आमतौर पर शादी-ब्याह के मौकों पर पहनी जाती हैं। इसके अलावा आजकल रेशम और धागे की चूड़ियां भी बाजार में मिलती हैं।
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कैसे बनती हैं बनारसी चूड़ियां?
बनारसी चूड़ियां वाराणसी शहर से आती हैं और इन्हें बनाने की प्रक्रिया बहुत ही मेहनत भरी होती है। इन चूड़ियों को बनाने में महीनों तक मेहनत करनी पड़ती है और इसमें कई तरह के रंग-बिरंगे धागों का उपयोग किया जाता है। बनारसी चूड़ियों की खासियत यह है कि इन्हें पहनने से महिलाएं बहुत ही सुंदर और आकर्षक दिखती हैं। इन चूड़ियों को शादी-ब्याह के मौकों पर खासतौर से पहना जाता है।
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कैसे बनती हैं कांच की चूड़ियां?
पारंपरिक कांच की चूड़ियां राजस्थान और गुजरात राज्यों से आती हैं। इन्हें बनाने के लिए कांच को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उन पर रंगीन धागे लपेटे जाते हैं। इसके बाद इन्हें आग पर पकाया जाता है, ताकि वे मजबूती से जुड़ जाएं। इन चूड़ियों की विशेषता यह है कि ये बहुत ही चमकीली होती हैं और इन्हें पहनने से हाथों में एक अलग ही शोभा आती है। राजस्थान और गुजरात में इन चूड़ियों की कई दुकानें भी मौजूद हैं।
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कैसे बनती हैं लकड़ी की चूड़ियां?
लकड़ी की पारंपरिक चूड़ियां महाराष्ट्र राज्य से आती हैं। इन्हें बनाने के लिए लकड़ी को काटकर उस पर अलग-अलग डिजाइन बनाई जाती हैं। इसके बाद इन पर रंग भरे जाते हैं और फिर इन्हें पॉलिश किया जाता है। इससे इनकी चमक बनी रहती है। इन लकड़ी की पारंपरिक चूड़ियों की खासियत यह है कि ये बहुत ही हल्की होती हैं और इन्हें पहनने से हाथों में दर्द नहीं होता है।