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पालन-पोषण के ये तरीके बच्चों में बनते हैं उदासी का कारण, बदलने की करें कोशिश

पालन-पोषण के ये तरीके बच्चों में बनते हैं उदासी का कारण, बदलने की करें कोशिश

लेखन सयाली
Jan 12, 2026
11:36 am

क्या है खबर?

हर माता-पिता अपने बच्चों को अपने तरीके से पालते हैं। कुछ बेहद कोमलता से उनका पालन-पोषण करते हैं तो कुछ सख्ती से पेश आते हैं। हालांकि, कुछ माता-पिता के पालन-पोषण के तरीके उनके बच्चों की उदासी का कारण बन जाते हैं। आज हम आपको अभिभावकों की बच्चों की देखभाल करने की ऐसी ही 5 आदतों के बारे में बताएंगे, जिनकी वजह से बच्चे चिड़चिड़े, नाखुश, गुस्सैल और अपने में रहने वाले बन जाते हैं।

#1

जरूरत से ज्यादा नियंत्रण रखना

कुछ माता-पिता अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी चीज पर नियंत्रण रखते हैं। वे उनके जागने, सोने, खेलने या खाली बैठने तक का समय तय करते हैं। ऐसा करके वे बच्चे को अनुशासित बनाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, इससे बच्चे को लगता है कि वह कैद में है और उसके पास कोई आजादी नहीं है। ऐसे बच्चे आगे चलकर जीवन के अहम निर्णय भी खुद नहीं ले पाते हैं, क्योंकि उन्हें माता-पिता के अनुसार चलने की आदत पड़ जाती है।

#2

बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करना

कई अभिभावक बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करते हैं, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। बच्चों से 'कमजोर लोग रोते हैं', 'अच्छे बच्चे शिकायत नहीं करते' या 'नाटक करना बंद करो' जैसी बातें नहीं कहनी चाहिए। इससे बच्चों को लगता है कि आपको उनकी भावनाओं से फर्क नहीं पड़ता और वे उन्हें मन में रखना शुरू कर देते हैं। इससे वे या तो गुस्से वाले बन जाते हैं या जीवनभर किसी से बातें साझा नहीं कर पाते।

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#3

ज्यादा लड़ाई-झगड़े करना

जिन घरों में रोजाना लड़ाई-झगड़े होते हैं, वहां के बच्चे हमेशा डरे हुए रहते हैं। ऐसे बच्चे पिता की तेज आवाज और मां के हल्के-से गुस्से से भी सहम जाते हैं। उन्हें सदमा लग जाता है और वे तनाव, चिंता और अवसाद का शिकार हो जाते हैं। ज्यादा झगड़े देख लेने के बाद बच्चे अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते हैं। कुछ बच्चे इस तरह के माहौल के चलते बहुत आक्रामक और गुस्सैल भी बन जाते हैं।

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#4

सख्त व्यवहार करना

बच्चों के साथ थोड़ी सख्ती से पेश आना सही है, लेकिन अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं होती। जब बच्चा कोई गलती करे तो उसे थोड़ी डांट लगाने में कोई बुराई नहीं है। हालांकि, अगर आप सजा के तौर पर बच्चे को मारते-पीटते हैं तो आपका बच्चा मानसिक रूप से बीमार हो जाएगा। इसके अलावा, बच्चों से बात-चीत बंद कर देना भी बेहद कठोर सजा होती है। जरूरी नहीं कि बात समझाने के लिए हमेशा सख्ती ही की जाए।

#5

तुलना करना

हर किसी ने बचपन में सुना होगा "उस बच्चे की तरह बनो, वह तुमसे ज्यादा काबिल है।" माता-पिता के लिए यह महज एक वाक्य है, लेकिन इसे सुनकर बच्चे का मनोबल टूट सकता है। तुलना करने से बच्चों को लगता है कि वे अच्छे नहीं हैं, जिससे उन्हें खुद पर शक होने लगता है और वे नई चीजें आजमाने में हिचकिचाते हैं। इससे उन पर एक दबाव बनने लगता है, जिसे संभाल पाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।

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