डिमेंशिया: जानिए बीमारी से जुड़े शुरुआती लक्षण, समय रहते पहचानना है जरूरी
क्या है खबर?
डिमेंशिया एक मानसिक बीमारी है, जिससे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में होती है, लेकिन इसके कुछ शुरुआती लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना गलत है। इस लेख में हम आपको डिमेंशिया के 5 शुरुआती लक्षण बताएंगे, ताकि आप समय रहते सावधान हो सकें और सही इलाज करवा सकें।
#1
याददाश्त में कमी आना
याददाश्त में कमी आना डिमेंशिया का सबसे आम और शुरुआती लक्षण है। अगर आपको या आपके किसी करीबी को हाल ही में हुई घटनाओं को याद रखने में परेशानी हो रही है तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति बार-बार एक ही बात भूल रहा है या हाल ही में हुई बातचीत को याद नहीं कर पा रहा है, तो यह डिमेंशिया का संकेत हो सकता है।
#2
निर्णय लेने में कठिनाई होना
डिमेंशिया होने पर निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। अगर आपको किसी साधारण काम जैसे खाना बनाने या कपड़े धोने में भी कठिनाई हो रही है और आप सही विकल्प चुनने में असमर्थ हैं तो यह एक संकेत हो सकता है कि आपको डिमेंशिया हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति छोटे-छोटे निर्णय लेने में भी संघर्ष करता है, जिससे उसकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है।
#3
समय और स्थान का भ्रम होना
डिमेंशिया के कारण समय और स्थान का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। अगर आपको लगता है कि आप अपने आसपास की चीजों को पहचानने में असमर्थ हो रहे हैं या किसी अन्य स्थान पर होने जैसा महसूस हो रहा है तो यह डिमेंशिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने घर या किसी परिचित जगह को भी अनजाना समझने लगता है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
#4
भाषा का उपयोग करना मुश्किल होना
डिमेंशिया होने पर भाषा का उपयोग करना भी मुश्किल हो जाता है। अगर आपको किसी शब्द का अर्थ समझने या उसे सही तरीके से बोलने में परेशानी हो रही है तो यह भी डिमेंशिया का एक संकेत हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति शब्दों को सही तरीके से नहीं जोड़ पाता, जिससे उसकी बातचीत करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति लिखने और पढ़ने में भी कठिनाई महसूस करता है।
#5
सामाजिक रूप से दूर रहना
अगर डिमेंशिया होने पर व्यक्ति सामाजिक गतिविधियों से दूर रहने लगता है और अपने दोस्तों और परिवार वालों से मिलना-जुलना पसंद नहीं करता है तो यह भी एक अहम लक्षण हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अकेले रहने या किसी भी सामाजिक गतिविधि में भाग लेने से कतराता है। इन सभी संकेतों को नजरअंदाज न करें क्योंकि समय रहते पहचान करने पर सही इलाज संभव हो पाता है जिससे मरीज बेहतर तरीके से जी सकता है।